मलेरिया, राउंडवर्म इन्फेक्शन की दवा बनाने वाले वैज्ञानिकों को मिला नोबेल

स्टॉnobel-prize-कहोम (5 अक्‍टूबर): 2015 में मेडिसिन फील्ड में दिए जाने वाले नोबेल प्राइज का ऐलान हो गया है। इस बार यह प्राइज दो वैज्ञानिकों के बीच साझा किया गया है। प्राइज का आधा हिस्सा आयरलैंड के विलियम कैम्पबेल और जापान के सतोशी ओमुरा को राउंडवर्म पैरासाइट्स के इन्फेक्शन की दवा डेवलप करने के लिए दिया गया है। वहीं, दूसरा हिस्सा चीन के यूयू तु को मलेरिया बीमारी के इलाज की दिशा में की गई खोज के लिए मिला है।

10 दिसंबर को नोबेल प्राइज सेरेमनी में तीनों विनर्स के बीच में 9.60 लाख डॉलर (करीब 6 करोड़ रुपए) की प्राइज मनी बांटी जाएगी। इसके अलावा उन्हें डिप्लोमा और गोल्ड मेडल भी दिए जाएंगे। नोबल प्राइज देने वाली अथॉरिटी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस साल के नोबेल प्राइज विनर्स ने कुछ बेहद खतरनाक परजीवी से फैलने वाली बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।

बता दें कि मच्छर से होने वाली मलेरिया जैसी बीमारी से हर साल दुनियाभर में 4,50,000 से ज्यादा लोग मारे जाते हैं। वहीं, अरबों लोगों में इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। राउंडवर्म पैरासाइट्स से दुनिया की एक तिहाई आबादी प्रभावित है। इससे रिवर ब्लाइंडनेस और लिम्फैटिक फायलैरियासिस समेत कई बीमारियां होती हैं। कई दशकों बाद इन बीमारियों से जुड़ी दो दवाओं की खोज गेमचेंजर साबित हुई हैं। इसमें रिवर ब्लाइंडनेस और लिम्फैटिक फायलैरियासिस के लिए एवरमैक्टिन (Avermectin) और मलेरिया के लिए आर्टेमिसिनिन (Artemisinin) दवा की खोज हुई है।

 
 
 
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