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मध्यप्रदेश चुनाव : दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस-बीजेपी की लड़ाई में बसपा ठोक पाएगी ताल?

2019 लोकसभा चुनावों का सेमीफाइनल कहे जा रहे 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हर राजनीतिक पार्टी के लिए अहम हैं. कांग्रेस, बीजेपी, समाजवादी समेत तमाम पार्टियों के राजनेता 5 राज्यों में अपनी धाक जमाने की पूरी कोशिश कर रही हैं, लेकिन सबसे अहम मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों को माना जा रहा है.मध्यप्रदेश चुनाव : दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस-बीजेपी की लड़ाई में बसपा ठोक पाएगी ताल?

दतिया विधानसभा सीट है खास
एक तरफ 15 साल से सत्ता में आसीन बीजेपी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में जुटी है. तो वहीं कांग्रेस अपनी शाख बचाने की कोशिश कर रही है. वैसे तो राज्य का हर जिला कांग्रेस और बीजेपी के लिए अहम है, लेकिन दातिया पर दोनों पार्टियां आंख गड़ाएं बैठी हैं. यह सीट इसलिए खास है, क्योंकि यहां से एक बार फिर सीएम शिवराज सिंह का राइट हैंड कहे जाने वाले नरोत्तम मिश्रा ताल ठोक रहे हैं.

क्या कहता है दतिया का सर्वे
पिछले 2 चुनावों से दतिया की जनता ने जो विश्वास नरोत्तम मिश्रा पर दिखाया है, वह 2018 विधानसभा चुनावों के सर्वे में बरकरार दिख रहा है. चुनावी सर्वे के अनुसार दतिया की 60 फीसदी से ज्यादा जनता ने बीजेपी की सरकार को कांग्रेस से बेहतर बताया है. सर्वे के अनुसार 50 में से 35 लोगों ने कांग्रेस को अच्छा विपक्ष नहीं माना है. लोगों का ये भी कहना है कि दतिया के विधायक लोगों के संपर्क में ज्यादा रहते हैं और छोटी से छोटी समस्या से रूबरू होते हैं. आम जनता की नरोत्तम मिश्रा को लेकर यह राय कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है.

हड्डी बनेगी बसपा!
कांग्रेस, बीजेपी के अलावा इस बार बसपा भी दतिया सीट से जीत का सपना संजो रही है. चुनावी रैली हो या फिर मीडिया से वार्ता बसपा नेता जगह-जगह तर्क देते फिर रहे हैं कि 2013 के चुनाव में बीजेपी की लोकप्रियता का ग्राफ चरम पर था, लेकिन अब वह बात नहीं रही. बसपा के दतिया में एंट्री मारने के बाद यह तिकड़म का काम कर सकती है. जानकारों का कहना है कि आम जनता के पास कांग्रेस, बीजेपी के अलावा विकल्प होने का वह फायदा उठा सकती है.

231 में से 230 पर ही होते हैं चुनाव
मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.

1951 में मिली थी कांग्रेस को जीत
2008 के लोकसभा चुनावों से पहले दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस का बोलवाला था. आजादी के बाद पहली बार 1951 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेता श्याम सुंदर दास को भारी मतों से जीत मिली. 1951 से 1961 तक कांग्रेस के सत्ता में रहने के बाद परिवर्तन 2008 तक जारी रहा.

2013 के चुनावी नतीजे
मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.

मध्यप्रदेश में कब हैं मतदान
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की सत्तासीन शिवराज सिंह चौहान की सरकार का कार्यकाल 7 जनवरी 2019 में खत्म हो रहा है. चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, राज्य में 28 नवंबर को मतदान होगा और 11 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी.

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