भोग की नहीं अपितु योग की पक्षधर है भारतीय संस्कृति -योगी आदित्यनाथ

- in उत्तरप्रदेश, लखनऊ

सीएमएस में ‘अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन’ का भव्य आयोजन

लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड ऑडिटोरियम में आयोजित ‘अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलित कर किया। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित इस एक-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन में जहाँ एक ओर मूर्धन्य विद्वानों ने अपने सारगर्भित विचारों से सामाजिक जागरूकता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की तो वहीं दूसरी ओर महिलाओं व बालिकाओं पर होने वाले अपराध व हिंसा के विरोध में आवाज उठाने की सी.एम.एस. की प्रतिबद्धता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इससे पहले, सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने मुख्य अतिथि योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उ.प्र. समेत विभिन्न आमन्त्रित अतिथियों, वक्ताओं आदि का हार्दिक स्वागत अभिनंदन किया। समारोह का शुभारम्भ ‘वन्दे मात्रम’ के सुमधुर प्रस्तुतिकरण से हुआ जबकि सी.एम.एस. छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘स्वागत गान’ को खूब सराहना मिली। विश्व में बालिकाओं एवं महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर विशेष साँस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उ.प्र. ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति भोग की नहीं अपितु योग की पक्षधर है। प्रदेश सरकार द्वारा बालिकाओं व महिलाओं की सुविधा व सुरक्षा हेतु अनेक कदम उठाये गये हैं परन्तु सबसे बड़ी बात यह है कि महिलाओं को अज्ञानता, अशिक्षा व अपमान के विरुद्ध आवाज उठानी होगी। प्रदेश सरकार महिलाओं को वह महत्व, अधिकार व सम्मान दिलाने को प्रतिबद्ध है, जिसकी वह वास्तव में हकदार हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बालिकाओं व महिलाओं से जुड़े इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए मैं सी.एम.एस. परिवार व संस्थापक डा. जगदीश गाँधी को हार्दिक बधाई देता हूँ।

रीता बहुगुणा जोशी, कैबिनेट मंत्री, महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री, उ.प्र., ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं पर हिंसा को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण हथियार आज के समय में मीडिया ही है। इसके साथ ही प्रशासनिक मशीनरी को भी मजबूत होना चाहिए और जन-मानस को भी विभिन्न कानूनों के प्रति जागरूक होना चाहिए। स्वाति सिंह, राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार), महिला एवं परिवार कल्याण, उ.प्र., ने कहा कि बेटियों का सुशिक्षित होना बहुत जरूरी है क्योंकि जब बेटी पढ़ेगी तभी बेटी बचेगी। इसी प्रकार सकारात्मक विचारों के प्रचार-प्रसार में मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में मीडिया को बहुत सोच-समझकर अच्छे और बुरे की पहचान करके ही चीजों को दिखाना चाहिए। लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को स्वयं को सशक्त महसूस करने की आवश्यकता है। महिलाएं समाज के विकास व उत्थान की धुरी हैं, अतः सामाजिक विकास से महिलाओं को जोड़ना अत्यन्त आवश्यक है। महिलाएं समाज के विकास व उत्थान की धुरी हैं, अतः सामाजिक विकास से महिलाओं को जोड़ना अत्यन्त आवश्यक है। सी.एम.एस. प्रेसीडेन्ट प्रो. गीता गाँधी किंगडन ने देश-विदेश से पधारे विद्वजनों का स्वागत करते हुए कहा कि सी.एम.एस. का मिशन है कि बच्चों को शैक्षिक ऊचाइयां प्रदान करने के साथ उन्हें समाजिक सरोकारों से भी जोड़े। जो बच्चे विद्यालय में समानता का व्यवहार करना सीख जाते हैं, वही आगे चलकर समाज में परस्पर सम्मान की भावना को जगाते हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन में देश-विदेश से पधारे मीडिया प्रमुखों, पत्रकारों, शिक्षाविदों एवं न्यायविदों  आदि ने ‘नारी के प्रति हिंसा को रोकने में मीडिया, स्कूल व समाज की भूमिका’ पर सारगर्भित परिचर्चा करते हुए हिंसा के कारणों, परिस्थितियों एवं उनके समाधान पर व्यापक चर्चा की। इस अवसर पर बोलते हुए शशि शेखर, एडिटर-इन-चीफ, हिन्दुस्तान, ने कहा कि जो संस्कार और बातें हमने पुराने जमाने में सीखी है, वही आज अधिक प्रासंगिक हो गया है। मीडिया के लोग और समाज, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। राहुल देव, वरिष्ठ पत्रकार, नई दिल्ली ने कहा कि समाज की विभिन्न संस्थाओं व जागरूक नागरिकों का एक सकारात्मक गठबंधन होना चाहिए जो अच्छे विचारों को समाज में पहुँचाएं। सुधीर मिश्रा, वरिष्ठ स्थानीय संपादक, नवभारत टाइम्स ने कहा कि हमें सबसे पहले लड़के-लड़कियों में भेद करना बन्द करना होगा और इसमें परिवार की भूमिका सर्वोपरि है। अतुल अग्रवाल, मैनेजिंग एडीटर, हिन्दी खबर, ने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा व अमानवीय व्यवहार चाहे लड़कों पर हो अथवा लड़कियों पर सर्वथा निन्दनीय है। हमें अपने घर-परिवार से ही संस्कारों व जीवन मूल्यों का विकास करना होगा।

इसके अलावा, आर. सी. गुप्ता, प्रधान संपादक, स्वतन्त्र चेतना, प्रमोद कुमार सिंह, स्थानीय संपादक, दैनिक प्रभात, अजीत अंजुम, वरिष्ठ पत्रकार, नई दिल्ली, अभिजीत मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ, अरविन्द चतुर्वेदी, स्टेट हेड, इंडिया न्यूज़, उ.प्र., रमेश अवस्थी, एडीटर, सहारा समय, उ.प्र./उत्तराखंड, क्षिप्रा माथुर, वरिष्ठ पत्रकार, राजस्थान, अखिलेश आनंद, सीनियर एंकर, एबीपी न्यूज, नई दिल्ली, दुर्गा प्रसाद मिश्रा, प्रिन्सिपल डेस्ट एडीटर, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इण्डिया, नई दिल्ली, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। सम्मेलन में विद्वजनों की सारगर्भित परिचर्चा के अलावा पैनल डिस्कशन का आयोजन भी किया गया, जिसका संचालन कविता सिंह, सीनियर एंकर, इंडिया न्यूज, नई दिल्ली, ने किया जबकि पैनलिस्ट सदस्यों में विकास मिश्रा, संपादक, आज तक, नई दिल्ली, नेहा बाथम, प्राइम टाइम एंकर, आज तक, नई दिल्ली, श्रीपाल शकटावट, वरिष्ठ संपादक, न्यूज 18, राजस्थान, दुर्गेश उपाध्याय, पूर्व पत्रकार, बीबीसी एवं मीडिया सलाहकार, यू.पी.ई.आई.डी.ए., साबू जार्ज, महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता, नई दिल्ली, पियूष एन्थोनी, सोशल पॉलिसी स्पेशलिस्ट, यूनिसेफ, उ.प्र., आफताब मोहम्मद, चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट, यूनिसेफ, उत्तर प्रदेश आदि शामिल हुए।

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