भूलकर भी न करें 13 सिंतबर को ये काम, नहीं तो उठाना पड़ सकता है आपको भारी नुकसान…

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13 सिंतबर से पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार धूम-धाम से देखने को मिलेगा। बल्कि देश ही नहीं इस त्योहार की धूम विदेशों तक देखने-सुनने को मिलती है। इस पावन त्योहार के आरंभिक दिन गणपति की प्रतिमा घर लाई जाती है। मान्यता के अनुसार 10 दिनों तक चलने वाला उत्सव प्रारंभ होगा और अनंत चतुर्थी के दिन समाप्त होगा। यह पर्व महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र के हर घर में भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना की जाती है। इसके अलावा कईं लोग अपने ऑफिस, दुकान व कई बड़ी जगहों पर गणेश प्रतिमा की स्थापना करते हैं ताकि बप्पा की कृपा उन पर बनी रहे।भूलकर भी न करें 13 सिंतबर को ये काम, नहीं तो उठाना पड़ सकता है आपको भारी नुकसान...

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी
वैसे तो गणेश चतुर्थी हर महीने में एक बार मनाई जाती है। जैसे कृष्णपक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। लेकिन सबसे बड़ी और खास चतुर्थी भाद्रपद मास में मनाई जाती है। क्योंकि मा्न्यता है कि इस माह में आने वाली चतुर्थी के दिन गणेश जी प्रकट हुए थे। जिस कारण इस दिन गणपति जी के अवतार लेने की खुशी में गणेश चतुर्थी धूम-धाम से मनाई जाती है और गणपति जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। जैसे कि हम पहले भी बता चुके हैं कि इस माह में आने वाली चतुर्थी से अगले 10 दिनों तक उत्सव चलता है।

इस दौरान भूलकर भी ये न करें

चतुर्थी के दिन या पूजा के समय पीले या सफ़ेद वस्त्र ही धारण करें।

अगर घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं तो प्रतिमा बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए।

अगर स्वयं नदी की मिट्टी से प्रतिमा बनाएं तो उसका फल सर्वश्रेष्ठ होगा।

चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का समापन न करें, नजर नीची रखकर ही अर्घ्य दें।

गणेश जी को भोग लगाते समय ध्यान रखें की उन्हें तुलसी दल न चढ़ाएं।

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