#बड़ा खुलासा: हमले से पहले मिले थे अलर्ट, फिर आगे कैसे बढ़ा 78 गाड़ियों का काफिला

जम्मू- कश्मीर के आईजी की एक चिट्ठी बताती है कि कश्मीर पुलिस ने 8 फरवरी को सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सेना और वायु सेना को आईईडी हमले की खुफिया सूचना दे दी थी. हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इतनी संवदेनशील सूचना दिए जाने के बावजूद सीआरपीएफ ने 2,547 सुरक्षा बलों के साथ 78 गाड़ियों के काफिले को इजाजत कैसे दी गई.#बड़ा खुलासा: हमले से पहले मिले थे अलर्ट, फिर आगे कैसे बढ़ा 78 गाड़ियों का काफिला

गुरुवार को जम्मू- कश्मीर में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ जिसमें 40 जवान शहीद हो गए. पुष्ट खुफिया जानकारी मिलने के बावजूद इतनी बड़ी घटना कैसे हुई और इंटेलीजेंस के स्तर पर कहां चूक हुई, इसकी छानबीन चल रही है. कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक की ओर से भेजी गई खुफिया जानकारी में सुरक्षा एजेंसियों को कहीं जाने या तैनाती से पहले उस जगह को सही ढंग से जांचने के लिए कहा गया था क्योंकि खुफिया जानकारी में आईईडी धमाके की संभावना जताई गई थी.

घटना के बाद जम्मू- कश्मीर में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में शुक्रवार को पुलिस ने 7 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया. इनके संबंध अवंतिपुरा फिदायीन हमले से जोड़ कर देखे जा रहे हैं. पुलिस को शक है कि इनके तार अवंतिपुरा (पुलवामा) आतंकी हमले से जुड़े हो सकते हैं. आशंका इस बात की भी है कि आगे किसी हमले की ये योजना हो. अवंतिपुरा हमले के पीछे पाकिस्तानी नागरिक कमरान का हाथ बताया जा रहा है. कमरान जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है जो पुलवामा, अवंतिपुरा और त्राल इलाके में सक्रिय देखा जाता रहा है. 

न्यूज एजेंसी आईएएनएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया सूचना सीआरपीएफ के कश्मीर ऑपरेशन सेक्टर में महानिरीक्षक (आईजी), सीआरपीएफ के श्रीनगर सेक्टर के आईजी, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कश्मीर मुख्यालय के आईजी, कश्मीर जोन के सभी रेंजों के पुलिस उप महानिरीक्षकों, श्रीनगर स्थित 15 कोर्प्स में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के डीआईजी, वायु सेना, केंद्रीय औद्योगिकी सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कमांडेंट और श्रीनगर स्थित नियंत्रण कक्ष में सशस्त्र पुलिस के एसएसपी को भी दी गई थी.

शुरुआती जांच के मुताबिक, दक्षिण कश्मीर के त्राल इलाके में फिदायीन हमले की योजना बनाई गई थी. पुलिस फिलहाल जैश के उन स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स की तलाश कर रही है जिन्होंने सीआरपीएफ के काफिले की सूचना जैश को पास की. उस हैंडलर की तलाश भी तेज है जिसने जैश के फिदायीन हमलावर आदिल अहमद डार को विस्फोटक मुहैया कराया था. डार ने ही विस्फोटकों से भरी अपनी टाटा सूमो गाड़ी को जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर सीआरपीएफ की एक बस में टक्कर मारकर विस्फोट कर दिया था. यह हमला गुरुवार दोपहर लगभग 3.15 पर हुआ. इसके बाद जैश ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए डार का एक वीडियो क्लिप जारी की.

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