ब्रेस्‍ट कैंसर के उपचारित मरीजों को वर्चुअल मीटिंग में मिला संतुष्टि का डोज

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-केजीएमयू के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग ने दूरदराज के मरीजों से सुनी उनके ‘मन की बात’

धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍व विद्यालय (केजीएमयू) के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा लखनऊ ब्रेस्‍ट कैंसर सपोर्ट ग्रुप के साथ एक वर्चुअल मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मीटिंग में देश के विभिन्‍न स्‍थानों से करीब 50 कैंसर सर्वाइवर्स ने सीधे अपनी समस्‍या के बारे में विभागाध्‍यक्ष डॉ आनन्‍द कुमार मिश्रा के साथ बात की।

डॉ आनंद कुमार मिश्रा ने बताया कि लखनऊ ब्रेस्‍ट कैंसर सपोर्ट ग्रुप के साथ माह के प्रथम बुधवार को एक बैठक आयोजित की जाती रही है, इस बैठक में कैंसर सर्वाइवर्स के साथ ही नये मरीज या जिनका इलाज चल रहा है, वे भी उपस्थि‍त रहते हैं, जिससे पुराने ठीक हुए मरीजों को देखकर उनमें जहां अपने ठीक होने के प्रति विश्‍वास बढ़ता है, वहीं अपनी समस्‍याओं के बारे में भी बात करके उसका समाधान पा जाते हैं।

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डॉ मिश्रा ने बताया कि वर्तमान माहौल में लॉकडाउन के चलते यह बैठक संभव नहीं हो पा रही थी, हालांकि एक ओपीडी जो चल रही है उसमें कैंसर वाले मरीजों को ही देखा जा रहा है, इसके अलावा मरीजों की जो इन्‍क्‍वायरी उन्‍हें व्‍हाट्स अप पर मिलती हैं, उसे वह हल कर देते हैं, लेकिन दूसरे राज्‍यों तथा जिलों के मरीजों खासतौर से जिन्‍हें दिखाने के लिए तारीख दी हुई थी, उनके लिए उनकी समस्‍याओं का समाधान होना जरूरी था।

उन्‍होंने बताया कि इसके अतिरिक्‍त किसी एक समस्‍या और उसके समाधान के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक जानकारी पहुंचाने के साथ ही विशेषकर जिन मरीज का उपचार हो चुका है, और फॉलोअप में चल रहे हैं, उनकी समस्‍याओं को सुन कर उसका समाधान करने में इस तरह की इस वर्चुअल मीटिंग अच्‍छी भूमिका निभा सकती हैं, मरीज को यदि घर बैठे अपनी समस्‍या का समाधान अपने चिकित्‍सक से मिल जाये, इससे उसे बहुत संतुष्टि मिलती है।

डॉ मिश्रा ने एक महत्‍वपूर्ण बात बताते हुए कहा कि इस लॉकडाउन की स्थिति में जब व्‍यक्ति अपने घर से बाहर नहीं निकल पा रहा है, इन परिस्थितियों में किसी भी व्‍यक्ति की मन:स्थिति का अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है, ऐसे में जिस मरीज का कैंसर का इलाज हुआ हो, उसकी मन:स्थिति कैसी हो सकती है, इसे सिर्फ समझा जा सकता है। किसी भी मरीज को एक अलग प्रकार की संतुष्टि तभी मिलती है, जब उसका उपचार करने वाले डॉक्‍टर से वह अपनी बात कह देता है, और डॉक्‍टर जब उसे सांत्‍वना दे देता है। इस मीटिंग के दौरान ‘सेहत टाइम्‍स‘ ने इन मरीजों के चेहरों पर डॉक्‍टर से बात करके जो भाव उत्‍पन्‍न हो रहे थे, उसमें उनकी और साथ ही उनके घरवालों की संतुष्टि साफ झलक रही थी।

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