OMG: बेटे की कमी पूरी करने के लाते हैं घर जमाई

- in ज़रा-हटके

महिलाओं को बस्तर का आर्थिक आधार माना जाता है और बेटियों के लिए घर जमाई लाना यहां की परंपरा रही है। इस भावनात्मक रिश्ते को जोड़ने के साथ ही पुत्रहीन परिवार को एक बेटा मिल जाता है। वहीं घर की संपत्ति और कृषि को देखने वाला रक्षक भी।इस व्यवस्था से वर पक्ष को आपत्ति भी नहीं होती और न ही स्वाभिमान पर ठेस लगती है। ऐसी ही व्यवस्था के चलते ओड़िशा के नवरंगपुर जिले के ग्राम घानागुड़ा का भगत नियानार में रूपमती से विवाह कर घर जमाई बना। हर्षोल्लास के साथ इन दोनों का विवाह शनिवार को संपन्न हुआ। बस्तर में घर जमाई बनाने की परंपरा है।

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OMG: बेटे की कमी पूरी करने के लाते हैं घर जमाई

सुंडीपारा नियानार की दसवीं पास रूपमती भतरा से विवाह कर घर जमाई बन रहे भगत ने बताया कि वह मोटर मैकेनिक का काम जानता है और हुनरमंद है। अपने परिवार को पाल सकता है। पारिवारिक आवश्यकता को देखते हुए उसने घर जमाई बनना स्वीकार किया है। इस व्यवस्था के चलते उसे नई जवाबदारी का भी एहसास हो रहा है।

पुत्र के लिए घर जवाई

हल्बा समाज के संभागीय अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता अर्जुन नाग बताते हैं कि जिस परिवार में बेटियां ही है और पुत्र का अभाव है। ऐसे माता-पिता पुत्र मिलने की लालसा से बेटी का विवाह कर घर जमाई लाते हैं। इसमें कुछ बुराई भी नहीं है। दामाद के रोजगार की व्यवस्था भी आमतौर पर हो जाती है। ऐसा करने से घर को एक संरक्षक भी मिल जाता है।

संपत्ति का संरक्षक

इधर मुरिया समाज के माटीपुजारी व सेवानिवृत्त आयकर अधिकारी सुखराम कच्छ बताते हैं कि कई परिवारों के पास जमीन जायजाद तो है पर किसानी करने के लिए लड़के नहीं है। घर जमाई के रूप में उन्हें बेटा तो मिलता ही है। वहीं कृषि की देखरेख के लिए एक जवाबदार व्यक्ति भी मिल जाता है इसलिए बस्तर में घर जमाई की परंपरा है।

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