बागमती बांध बना रही एजेंसी ब्लैक लिस्टेड, 74 करोड़ रुपए हुए वापस

- in बिहार, राज्य
मुजफ्फरपुर.बाढ़ के दौरान चार स्थानों पर बागमती बांध टूटने के मामले में इंजीनियरों पर कार्रवाई के बाद अब जलसंसाधन विभाग ने बांध निर्माण में लापरवाही के लिए निर्माण एजेंसी को दस वर्षों के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। एचसीएल की कार्यकारी एजेंसी अवंतिका कॉन्ट्रैक्टर्स एवं जीएच रेड्डी एंड एसोसिएट्स प्रा.लि. पर तय समय के अनुसार बांध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण तथा निर्माण नहीं कराने का आरोप है। समय पर काम नहीं होने से जलसंसाधन विभाग को 74 करोड़ रुपए वापस भी करना पड़ा है।बागमती बांध बना रही एजेंसी ब्लैक लिस्टेड, 74 करोड़ रुपए हुए वापस
जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख अरुण कुमार ने निर्माण एजेंसी को दस साल के लिए ब्लैक लिस्टेड करते हुए कहा है कि ग्रामीणों के विरोध का बहाना बनाकर समय पर बांध का निर्माण पूरा नहीं किया गया। फेज-2 के तहत कटरा के खंगुराडीह तथा धनौर कटरा रिंग बांध का निर्माण शुरू नहीं हुआ। कटरा के मोहनपुर तथा धनौर में स्लुइस गेट का भी निर्माण पूरा नहीं हुआ। जबकि, मार्च 2017 तक ही बांध का निर्माण पूरा करना था।

बाढ़ प्रबंधन योजना का री-एस्टीमेट नहीं देने से रुपए वापस

बार-बार के निर्देश के बावजूद एजेंसी की ओर से री-इस्टीमेट नहीं देने के कारण वित्तीय वर्ष 2016-17 में 73.93 करोड़ रुपए वापस करने पड़ गए। मार्च माह तक बागमती बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत 23 करोड़ रुपये में से महज 5 करोड़ रुपए का ही काम कराया जा सका। निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 10 से 15 फीसदी काम ही पूरा हो सका। जबकि, 16 जनवरी को हुई बैठक में कार्यकारी एजेंसी ने 31 मार्च तक पूरा करने का भरोसा दिलाया था। अभियंता प्रमुख ने कहा है कि संरचना कार्यों में भी लापरवाही बरती गई।

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बाढ़ अवधि में एजेंसी ने रोक दिया था बांध की मजबूती का काम

अभियंता प्रमुख ने अपने आदेश में कहा है बाढ़ प्रबंधन फेज-2 के तहत बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य के तहत बाएं तटबंध के 53.16 से 81.10 किलोमीटर तथा दाएं बांध के 56.97 से 85.00 किलोमीटर तक सोलिंग सहित पूरा काम 31 मार्च तक पूरा करना था। साथ ही बाएं तटबंध के 81.10 से 89.08 तथा दाएं तटबंध के 85.00 से 91.86 किलोमीटर तक नए बांध का निर्माण पूरा करना था। मार्च तक काम पूरा नहीं किए जाने के बाद अप्रैल-मई 2017 से काम बंद कर दिया गया। दिखावे के लिए 5-6 ट्रैक्टर को ही कार्य में लगाया गया। अधूरे सेक्शन को भी पूरा नहीं किया गया।
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