बर्फ से ढकी दीवारों से घिरी सड़के देख घूम जायेगा आपका भी सिर

- in पर्यटन

जी हाँ कैलाश मानसरोवर की यात्रा सबसे मुश्किल मानी जाती है। भगवान शिव के इस स्थान के दर्शन पाने के  लिए हर साल हजारों साधु-संत, श्रद्धालु कई दिनों की कठिन यात्रा के बाद  कैलाश पहुंचते हैं।  विदेश मंत्रालय हर साल जून से सितंबर के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करता है। इस यात्रा पर बहुत ही ऊंची-ऊंची  बर्फ से ढकी पहाडियां, बर्फ को काट कर बनाए गए रास्ते और झील, कुदरती पहाडियों के नजारे किसी जन्नत से कम नहीं लगते। सड़कों के आस-पास बर्फ से ढकी कई फुट ऊंची दीवारें बन जाती है जहां का नजारा सच में किसी को भी जन्नत से कम नहीं लगता।  नए रास्ते की बदौलत अब यात्री अपनी गाड़ी से ही कैलाश मानसरोवर तक पहुंच सकेंगे।बर्फ से ढकी दीवारों से घिरी सड़के देख घूम जायेगा आपका भी सिर

–  लिपूलेख तक सड़क का रास्ता बनने के बाद तीर्थयात्री आसानी से मानसरोवर झील तक पहुंंच सकेंगे। यात्री बस से नोम, लाजी, जोनोबा होते हुए चुगु तक पहुंच जाते हैं।

– इस नए रास्ते से एक महीने की यात्रा अब एक हफ्ते में पूरी होगी। इस नए रास्ते का फायदा सबसे ज्यादा बुजुर्गों को होने वाला है क्योंकि अब उन्हें पैदल नहीं चलना पड़ेगा।

– 22 हजार 28 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस धाम की यात्रा में अब सिक्किम के नाथुला दर्रे के नए रास्ते का इस्तेमाल  होगा।

-केन्द्र सरकार कैलाश-मानसरोवर यात्रा को आसान बनाने के लिए उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख को सड़क मार्ग से जोड़ने जा रही है। 

 -धारचूला से लिपूलेख तक बनने वाली सड़क के लिए अभी तक 35 कि.मी. तक के पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने के लिए तैयार भी किया जा चुका है। 

– कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू होने का इंतजार भगवान शिव के भक्त हर साल बडी बेसब्री से करते है। भोले भंडारी के भक्तों के लिए एक खुशखबरी है कि चीन ने यात्रियों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है। अब यात्री अपनी गाड़ी से ही कैलाश मानसरोवर तक पहुंच सकेंगे।

Patanjali Advertisement Campaign

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

लंदन में मौजूद है यह खूबसूरत जगहें

पूरी दुनिया में ऐसी बहुत सारी खूबसूरत जगह