तो इसलिए इस बार बढ़ सकती है अमरनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या, इस बार पुख्ता बंदोबस्त के साथ…

अमरनाथ यात्रा अपने चरम पर है. अभी तक लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके है. उम्मीद है कि सावन के पावन महीने में भोले के भक्तों की तादाद और बढ़ जाएगी. ऐसे में अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता बंदोबस्त है. इंडियन आर्मी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ. ITBP, NDRF, SDRF, MRT के जवान श्रद्धालओं की चौकसी के लिए तैयार है. आपको बता दें कि अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू हो चुकी है. और 15 अगस्त तक चलेगी.

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बता दें कि बाबा बर्फानी के धाम अमरनाथ में रोजाना हजारों श्रद्धालु बेखौफ बाबा बर्फानी के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं. वहीं सावन के महीने में तदाद और बढ़ने की उम्मीद है. अमरनाथ गुफा में हर साल बर्फ का शिवलिंग बनता है, जो भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है. इस गुफा तक पहुंचने के दो रास्ते हैं. तीर्थयात्री या तो 14 किलोमीटर छोटे बालटाल मार्ग से जाते हैं या फिर 45 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से. बालटाल मार्ग से जाने वाले तीर्थयात्री दर्शन करने वाले दिन ही बेस कैंप लौट आते हैं. इन दोनों ही रास्तो में जगह जगह आर्मी के जवान तैनात है. इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शिविर और भंडारे लगाये गये है. जिनमे रात्रि विश्राम के साथ खाने-पीने की व्यवस्था की गई है.

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अमरनाथ यात्रा के दौरान बुराड़ी मार्ग पर अक्सर यात्रियों को समस्या सबसे ज्यादा आती है, क्योंकि ज्यादा ऊंचाई होने पर सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है. बालटाल मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. जवानों ने अमरनाथ यात्रियों को सुरक्षा देने के अलावा यात्रा में जरूरत पड़ने वाले ऑक्सीजन और दवाइयां भी उपलब्ध कराई. साथ ही ऊपर से गिरते पत्थरों और तेज बहते नालों के बीच आते पत्थरों से भी आईटीबीपी के जवानों ने शील्ड की दीवार बनाकर यात्रियों की सुरक्षा की.

किसी भी बड़े खतरे को भांपते हुए, सुरक्षा बलों और गृह मंत्रालय ने इस साल अमरनाथ यात्रा को लेकर कड़े सुरक्षा के प्लान तैयार कर लिए हैं. सुरक्षा के लिहाज से कैमरे, ड्रोन और हेलीकॉप्टर से नजर रखी जा रही है. साथ ही यात्रा मार्ग पर सुरक्षा घेरे तैयार किया गया है, जो किसी भी परस्थिति में कार्रवाई करने लिए सैदव मुस्तैद रहता है.

इस साल पिछले 16 दिनों में करीब 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा की है. जो पहले पखवाड़े में पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है. पवित्र गुफा की खोज 1850 में एक मुस्लिम चरवाहा बूटा मलिक ने की थी. लगभग 150 सालों से चरवाहे के वंशजों को पवित्र गुफा पर आने वाले चड़ावे का कुछ भाग दिया जाता है. इस साल 45 दिवसीय अमरनाथ यात्रा का समापन 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा. 

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