बंसीलाल की सियासी विरासत को पूरा परिवार अब मिलकर आगे बढ़ाएगा…..

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 हरियाणा के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके चौधरी बंसीलाल और मुक्केबाजी का खेल…यह दो बड़ी खासियत हैं, जिनकी वजह से भिवानी राष्ट्रीय फलक पर छाया रहता है। आईने अकबरी में भी भिवानी का जिक्र है। कहा जाता है कि यह नगर राजपूत राजा नीम ने अपनी रानी भानी के नाम पर बसाया था। धीरे-धीरे इसका नाम बिगड़कर भ्याणी और बाद में भिवानी पड़ गया। कुछ लोगों का मानना है कि यहां माता भवानी ने अपने चरण रखे थे। मुगल काल में भिवानी महत्वपूर्ण औद्योगिक नगर होता था। आज भी यह शहर हरियाणा और राजस्थान के बीच उद्योग का केंद्र है। भिवानी तीन-तीन मुख्यमंत्रियों की जन्मस्थली रहा है। बंसीलाल, बनारसी दास गुप्ता और मा. हुकुम चंद। राजनीतिक तौर पर इसे पहचान बंसीलाल के परिवार से ही मिली। ऐसे में बंसीलाल का परिवार उनकी राजनीतिक विरासत अब मिलकर संभालेगा।

पूर्व सांसद श्रुति चौधरी को लंबे अरसे बाद ताऊ रणबीर महेंद्रा और फूफा सोमवीर सांगवान का मिलेगा आशीर्वाद

बंसीलाल कभी इंदिरा गांधी और संजय गांधी के बेहद करीबी हुआ करते थे। उनके छोटे बेटे सुरेंद्र सिंह की उद्योगपति ओमप्रकाश जिंदल के साथ विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। सुरेंद्र सिंह की पत्नी किरण चौधरी और बेटी श्रुति चौधरी कांग्रेस की राजनीति करती हैं। किरण कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं और श्रुति भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं। बंसीलाल के बड़े बेटे रणबीर महेंद्रा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष और मुंढाल व बाढड़ा से दो बार विधायक रह चुके हैं। आगे उनके बेटे अनिरुद्ध चौधरी बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष रहे। बंसीलाल के दामाद सोमवीर सांगवान लोहारू से दो बार विधायक रहे। दोनों ने दो-दो चुनाव हारे भी।

लोस चुनाव में साथ दिखाई देंगे धुर सियासी विरोधी, विस चुनाव में जेठ और ननदोई की मदद करेंगी किरण

एक समय था, जब इस परिवार के सदस्यों में खुलकर राजनीतिक विरोधाभास थे। प्रापर्टी के झमेले इसमें एक बड़ा कारण रहे हैं। बंसीलाल परिवार के राजनीतिक बिखराव की बड़ी वजह भी आपस की फूट रही। अब धीरे-धीरे परिवार के सदस्यों को समझ आने लगा कि राजनीतिक तौर पर स्थापित रहने के लिए एक दूसरे का साथ बेहद जरूरी है। लिहाजा परिवार अब एकजुट होता नजर आ रहा है।

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में श्रुति चौधरी को फिर उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस ने श्रुति चौधरी को एक बार फिर भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से टिकट दिया है। खबरें आ रही हैं कि चुनाव में ताऊ रणबीर महेंद्रा (किरण चौधरी के जेठ) तथा फूफा सोमवीर सांगवान (किरण के ननदोई) खुलकर श्रुति की मदद करेंगे। विधानसभा चुनाव में इसी तरह की मदद किरण और श्रुति भी रणबीर महेंद्रा और सोमवीर की मदद  करेंगी।

2004 में बंसीलाल परिवार के एक साथ तीन लोग जीते थे चुनाव

वर्ष 2004 में कांग्रेस की लहर के चलते भिवानी जिले से बंसीलाल परिवार के तीन लोग विधायक चुने गए थे। इनमें किरण चौधरी तोशाम, रणबीर महेंद्रा मुंढ़ाल तथा सोमवीर सांगवान लोहारू से विधायक बने थे। वर्ष 2009 में किरण चौधरी फिर से चुनाव जीतीं। रणबीर महेंद्रा कम मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे।

2009 का चुनाव जीती थीं श्रुति और 2014 का हारी

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के धर्मवीर ने इनेलो के बहादुर सिंह को 1,29,394 वोटों से हराया था। भाजपा उम्मीदवार को मोदी लहर में 39.26 फीसदी वोट शेयर के साथ 4,04,542 वोट मिले थे। इनेलो के बहादुर सिंह को 26.70 फीसदी वोट के साथ 2,75,148 वोट पड़े थे। कांग्रेस की श्रुति चौधरी को 2,68,115 वोट मिले थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की श्रुति चौधरी ने जीत हासिल की थी। तब उन्होंने इनेलो के डाॅ. अजय सिंह चौटाला को हराया था।

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