बंगलादेशी राजदूत ने बताया बंगलादेश में अब तक करीब सात लाख रोहिंग्या मुस्लिम आ चुके हैं

मुंबई । बंगलादेशी राजदूत सैयद मुअज्जम अली ने रोहिंग्या समस्या को वर्तमान समय का सबसे बड़ा मानवीय संकट बताते हुए कहा है कि अब म्यांमार बंगलादेश में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को धीरे-धीरे वापस लेने पर राजी हो गया है। दोनों देशों में यह समझौता एक सप्ताह पहले ही हुआ है।

मंगलवार को मुंबई प्रेसक्लब द्वारा आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में बोलते हुए मुअज्जम अली ने कहा कि हमें खुशी है कि लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर हम म्यांमार के साथ यह समझौता करने में कामयाब रहे हैं। जिसके तहत म्यांमार अपने यहां से जबरन भगाए गए रोहिंग्या मुस्लिमों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने को तैयार हो गया है।

मुअज्जम अली के अनुसार बंगलादेश में 25 अगस्त, 2017 के बाद से अब तक करीब सात लाख रोहिंग्या मुस्लिम आ चुके हैं। जबकि चार लाख रोहिंग्या उसके पहले बंगलादेश आ चुके थे। अली के अनुसार भारत ने बंगलादेश में रह रहे इन शरणार्थियों के लिए न सिर्फ राहत सामग्री भिजवाई, बल्कि उनकी वापसी का मुद्दा भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत आगे भी इस मुद्दे पर बंगलादेश की मदद करता रहेगा।

इस्लामी प्रचारक जाकिर नाईक के मुद्दे पर बोलते हुए मुअज्जम अली ने कहा कि बंगलादेश एक सेक्युलर देश है, वह ऐसे किसी प्रचारक को मान्यता नहीं देता। उन्होंने कहा कि जाकिर नाईक पर भारत से छह महीने पहले ही बंगलादेश प्रतिबंध लगा चुका था। बता दें कि बंगलादेश में हुए एक आतंकी विस्फोट के बाद एक विस्फोटकर्ता के जाकिर नाईक से प्रभावित होने की बात सामने आई थी।

भारतीय जांच एजेंसियों ने इसके बाद ही जाकिर नाईक पर कार्रवाई शुरू की और अब उस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। बंगलादेश में उक्त घटना होने के समय जाकिर नाईक भारत से बाहर था और तब से वह भारत नहीं लौटा है। मुअज्जम अली ने आतंकवाद पर भारत के विचारों का समर्थन करते हुए माना कि अच्छा और बुरा आतंकवाद नहीं होता। आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जाना चाहिए।

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