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फोन पर बात करते हुए रेलवे ट्रैक पार कर रहे इंजीनियर की मौत, बस बनने जा रहा था दूल्हा

कुछ ही घंटों बाद जिस युवक की बारात जानी थी, उसकी ट्रेन से कटकर मौत हो गई। सीबीगंज के गांव नदोसी में रविवार सुबह करीब नौ बजे हुई इस दर्दनाक घटना से शादी के उल्लास में डूबे दोनों परिवारों में हाहाकार मच गया। पेशे से इंजीनियर 26 वर्षीय नरेश पाल के सिर रविवार शाम को ही सेहरा सजना था। सुबह जब पूरा परिवार तैयारियों में व्यस्त था, तभी वह फोन पर बात करते हुए टहलने निकल गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गांव के पास जब रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे, तभी अचानक अप लाइन पर ट्रेन आ गई। वह इस ट्रेन से बचने के लिए डाउन लाइन पर गए, लेकिन उस पर आ रही राज्यरानी एक्सप्रेस से नहीं बच सके। नरेश पाल गांव नदोसी में रहने वाले जानकी प्रसाद गंगवार के बेटे थे। वह नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रहे थे। उनकी शादी शाहजहांपुर के मीरानपुर कटरा कस्बे में तय हुई थी। दोपहर के वक्त उनकी बारात घर से रवाना होनी थी। सुबह करीब आठ नरेश पाल टहलते हुए रेलवे क्रासिंग की तरफ निकल गए थे। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक करीब सवा नौ बजे घर लौटते वक्त गांव से करीब दो सौ मीटर दूर पोल नंबर 1319/26 के नजदीक नरेश मोबाइल पर बात करते रेलवे ट्रैक क्रॉस कर रहे थे। इसी दौरान अप लाइन पर अचानक ट्रेन आ गई। डाउन लाइन पर कूदकर वह इस ट्रेन से तो बच गए, लेकिन इसी वक्त डाउन लाइन पर लखनऊ की ओर जा रही राज्यरानी एक्सप्रेस गुजरी, जिसकी चपेट में आने से वह नहीं बच सके। ट्रेन से कटकर उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

फोन पर बात करते हुए रेलवे ट्रैक पार कर रहे इंजीनियर की मौत, बस बनने जा रहा था दूल्हापरिवार के लोगों ने बताया कि शादी तय होने के बाद नरेश ने नोएडा की अपनी कंपनी की ओर से करगैना स्थित पराग फैक्ट्री में अपनी अस्थाई नियुक्ति करा ली थी। उनकी शादी शाहजहांपुर के मीरानपुर कटरा के मोहल्ला तहबरगंज निवासी साधुराम गंगवार की बेटी उमा के साथ तय हुई थी। शनिवार को ही घर में लग्न मंडप आदि वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न हुए थे। रविवार की शाम पांच बजे बारात जाने की तैयारी थी। हादसे की खबर पर मीरानपुर कटरा से वधू पक्ष के लोग भी सीबीगंज पहुंच गए। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवार के सुपुर्द कर दिया।

लोग चिल्लाए लेकिन नरेश सुन न सके
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक उन्होंने नरेश जिस वक्त रेलवे ट्रैक के नजदीक थे, उसी वक्त उन्होंने दूर से ट्रेन को आते देख लिया था। उन्होंने नरेश को ट्रैक की ओर बढ़ते देख चिल्लाकर उन्हें सचेत करने की कोशिश की लेकिन नरेश मोबाइल पर बात करने में इतने मशगूल थे कि ट्रेन बिल्कुल नजदीक होने के बावजूद रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए और देखते-देखते हादसा हो गया। पुलिस ने उनका मोबाइल परिवार के सुपुर्द कर दिया।

न्योता था बारात का.. रो पड़े अंतिम यात्रा में शामिल हुए लोग
पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवार के सुपुर्द किया गया। शाम पांच बजे रिश्तेदारों को बारात लेकर चलने का न्योता भेजा गया था, उस वक्त नरेश के बड़े भाई मुकेश उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। हादसे में मौत के बाद सभी की आंखें नम थी।

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