प्रणब मुखर्जी के भाषण से RSS में बढ़ी आवेदन की संख्या

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बीते 7 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम के शिरकत करने के बाद RSS में शामिल होने वालों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है. प्रणब मुखर्जी ने संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित किया था. इस कार्यक्रम के बाद संघ में शामिल होने वालों के लिए दिए गए आवेदनों में 4 गुना इजाफा हुआ है. खासकर इन आवेदनों में पूर्व राष्ट्रपति के गृह राज्य, पश्चिम बंगाल से इस संगठन में शामिल होने का अनुरोध करने वालों की संख्या में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है. संघ के वरिष्ठ नेता बिप्लब रॉय ने आज मीडिया के साथ बातचीत में यह जानकारी दी. बता दें कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के निमंत्रण पर प्रणब मुखर्जी की सहमति के बाद से कई कांग्रेस नेताओं ने उनसे इसमें शिरकत नहीं करने का आग्रह किया था. खुद पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी इसको लेकर आपत्ति की थी.

40 फीसदी अनुरोध बंगाल से आए

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता बिप्लब रॉय ने कहा कि नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण के बाद संगठन में शामिल होने के लिए संघ को लोगों की तरफ से कई आवेदन मिले हैं. रॉय ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा, ‘एक जून से छह जून के बीच औसतन हमें हमारी वेबसाइट ‘ज्‍वाइन आरएसएस’ पर राष्ट्रीय स्तर पर रोजाना 378 अनुरोध प्राप्त होते थे. 7 जून को हमारे शिक्षा वर्ग के को प्रणब मुखर्जी के संबोधित करने के बाद से हमें 1779 आवेदन मिले हैं. 7 जून के बाद हमें रोजाना 1200-1300 अनुरोध मिल रहे हैं.’ बिप्लब रॉय ने बताया कि संघ को प्राप्त सभी आवेदनों में से 40 फीसदी अनुरोध पश्चिम बंगाल से आए हैं.

प्रणब के जाने से संघ में बढ़ी दिलचस्पी

यह पूर्व राष्ट्रपति के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने का असर ही है कि आरएसएस के प्रति लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ी है. इसकी पुष्टि खुद संघ के नेता बिप्लब रॉय ने की. मीडिया के इस सवाल पर कि प्रणब मुखर्जी के संघ कार्यक्रम में भाग लेने से क्या लोगों के बीच आरएसएस की लोकप्रियता बढ़ी है, उन्होंने कहा, ‘इस तरीके से व्याख्या करना सही नहीं होगा कि मुखर्जी की वजह से आरएसएस की स्वीकार्यता बढ़ी है. संघ समाज में अपनी गतिविधियों की वजह से लोगों के बीच लोकप्रिय है.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन, हां, मुखर्जी के भाषण के बाद से लोगों में दिलचस्पी बढ़ी है. यह उसके कारणों में से एक है.’ बता दें कि धुर कांग्रेसी नेता रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में जाने को लेकर करीब एक हफ्ते तक देश में चर्चाएं चली थीं. इस दौरान कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व की कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके प्रणब मुखर्जी के सहयोगी नेताओं ने भी पूर्व राष्ट्रपति को संघ के कार्यक्रम में न जाने की सलाह दी थी.

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शर्मिष्ठा ने कहा था- भाषण भुला दिए जाएंगे, तस्वीरें रह जाएंगी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज किया था. कांग्रेस की नेत्री शर्मिष्ठा ने कहा था कि उनके पिता नागपुर जाकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को फर्जी खबरें गढ़ने और अफवाहें फैलाने की सुविधा मुहैया करा रहे हैं. उन्होंने कहा था, ‘उनके भाषण तो भुला दिए जाएंगे, लेकिन तस्वीरें (विजुअल्स) रह जाएंगी.’ प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वायरल हुई फर्जी तस्वीरों पर भी शर्मिष्ठा ने पिता को अपना बयान याद कराया था. संघ के कार्यक्रम के समाप्त होने के तुरंत बाद शर्मिष्ठा ने इन तस्वीरों के वायरल होने पर कहा था, ‘वह आज की घटना से समझ गए होंगे कि भाजपा का दुष्प्रचार (डर्टी ट्रिक्स) विभाग किस तरह से काम करता है.’

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