पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह के स्वास्थ्य में नहीं हुआ सुधार, एम्‍स में चल रहा इलाज

नई दिल्ली के आॅल इंडिया इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में बीते एक हफ्ते से आइसीयू (ICU) में भर्ती पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. रघुवंश सिंह (Dr. Raghuvansh Singh) की तबीयत देर रात और बिगड़ गई। उन्हें जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया है। डॉक्‍टरों को उम्‍मीद थी कि शनिवार दोपहर तक कुछ तबीयत में सुधार होगा। मगर अब भी उनकी हालत में कोइर् सुधार नहीं है। उन्‍हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। एम्‍स के डॉक्‍टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
डा. सिंह के बड़े पुत्र सत्यप्रकाश सिंह ने एम्स से शुक्रवार देर रात फोन पर बताया कि रात अचानक उनकी तबीयत गंभीर हो गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखने का फैसला लिया।  चिकित्सकों ने शनिवार की सुबह तक हालत में सुधार की उम्मीद जताई है।  इसी बीच हांगकांग (Hongkong) से उनके दूसरे पुत्र शशि प्रकाश के भी  शनिवार (Saturday) की सुबह तक दिल्ली पहुंचने की सूचना है।
नड्डा ने  रघुवंश सिंह से सेहत का हाल जाना
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राजद छोडऩे वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश सिंह को फोन कर उनका कुशलछेम पूछा। दिल्ली एम्स में भर्ती रघुवंश सिंह इन दिनों राजद प्रमुख लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख चर्चा में छाए हुए हैं। बता दें कि रघुवंश को निशाने पर रखने वाले एनडीए नेताओं का व्यवहार अचानक बिल्कुल बदल गया है। रघुवंश के इस्तीफे की खबर मिलते ही जहां जदयू संसदीय दल के नेता ललन सिंह ने सबसे पहले उनके फैसले का स्वागत किया तो उन्हेंं लगे हाथ जदयू में शामिल होने का न्योता भी दे दिया। भाजपा से बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के अलावा अन्य कई नेताओं ने भी राजद में रघुवंश को अपमानित करने का आरोप लगाया।
लालू का चार दशक पुराना साथ छोड़ने को लेेकर चर्चा में
पूर्व केंद्रीय मंत्री डाॅ. रघुवंश सिंह ने राजद से राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष पद से हाल ही में एम्‍स से ही राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को पत्र लिखकर इस्‍तीफा दे दिया है। इस्‍तीफा देने के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) तथा राजद प्रमुख लालू प्रसाद को पत्र लिखने को लेकर चर्चा में हैं। उन्‍होंने नीतीश कुमार को लिखे पत्र में दुनिया के सबसे पहले गणतंत्र (First Republic of the world) वैशाली का सम्‍मान का मुद्दा उठाया है। जिसके बाद गणतंत्र की जननी वैशाली की चर्चा पूरे देश में हो रही है।

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