परिंदे ने नन्‍हे पक्षी की सच्‍ची मदद

littlebird_21_09_2015एक नन्हा परिंदा अपने घोंसले से बहुत दूर आ गया था। उसने उड़ना सीखना अभी शुरू ही किया था और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह वापस कैसे पहुंचे। वह उड़ान भरने की काफी कोशिश करता, पर बार-बार कुछ ऊपर उठकर गिर जाता। कुछ दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ बैठा यह सब गौर-से देख रहा था।

कुछ देर बाद वो उसके करीब पहुंचा और उससे पूछा – ‘क्या हुआ नन्हे, काफी परेशान हो?” नन्हा परिंदा बोला – ‘मैं धीरे-धीरे अपने घोंसले से बहुत दूर निकल आया हूं और मुझे शाम होने से पहले अपने घोंसले तक लौटना है। मुझे उड़ान भरना अभी अच्छे से नहीं आता। क्या आप मुझे उड़ना सिखा सकते हैं?” अनजान परिंदा बोला – ‘जब उड़ान भरना सीखा नहीं तो इतना दूर निकलने की क्या जरूरत थी?”

यह कहकर वह नन्हे परिंदे का मजाक उड़ाने लगा। अनजान परिंदा हंसते हुए बोला – ‘देखो, हम तो उड़ान भरना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते हैं।” इतना कहकर अनजान परिंदे ने उस नन्हे परिंदे के सामने पहली उड़ान भरी। वह फिर थोड़ी देर बाद लौटकर आया और दो-चार कड़वी बातें बोल पुन: उड़ गया। ऐसा उसने पांच-छह बार किया। आखिर में एक बार जब वो वापस लौटा तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था।

यह देख अनजान परिंदा खुश होते हुए अपने साथी से बोला – ‘आखिर उस नन्हे परिंदे ने उड़ान भर ही ली?” यह सुनकर उसका साथी बोला – ‘लेकिन तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो? तुमने तो उसका कितना मजाक बनाया!” अनजान परिंदा बोला – ‘तुमने मेरी सिर्फ नकारात्मकता पर ध्यान दिया, लेकिन वास्तव में यह मेरा उसे उड़ना सिखाने का अनूठा तरीका था। मैं उसके लिए अजनबी था। यदि मैं उसको सीधे तरीके से उड़ना सिखाता तो वह पूरी जिंदगी मेरे एहसान के नीचे दबा रहता। उसे दूसरों से मदद मांगने की आदत भी पड़ जाती। जब मैंने उसे कोशिश करते हुए देखा, तभी समझ गया था कि इसे बस थोड़ी-सी दिशा देने की जरूरत है और जो मैंने बार-बार उसके सामने उड़ते हुए उसे अनजाने में दी। अब वो पूरी जिंदगी खुद से कोशिश करेगा और दूसरों से कम मदद मांगेगा।”

सच्ची मदद वही है, जो मदद पाने वाले को ये महसूस न होने दे कि उसकी मदद की गई है।

 
 
 

 

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