नीतीश सरकार ने लिए ये दो बड़े फैसले, जिसके बाद शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को…

बिहार सरकार ने दो अहम फैसले लिए हैं जिसके बाद शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को फायदा होने वाला है. इस नए फैसले के तहत अब शिक्षा सेवा के अधिकारियों के लिए  B.Ed की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है साथ ही बिहार शिक्षा सेवा नियमावली में भी संशोधन किया गया है. 

वहीं शिक्षा विभाग ने दूसरा फैसला ये लिया है कि अब जिला अपीलीय प्राधिकार के 58 पीठासीन पदाधिकारियों का कार्यकाल 31 दिसंबर तक रहेगा जिसको लेकर विभाग ने संकल्प भी जारी कर दिया है. 

बिहार शिक्षा सेवा के अधिकारियों की ओर से मांग की जा रही थी जिसपर शिक्षा विभाग ने मुहर लगते हुए फैसला लिया है कि अब शिक्षा सेवा के लिए  बीएड (B.Ed) कोर्स पूरा करने की अनिवार्यता नहीं रहेगी. इसके साथ ही बिहार शिक्षा सेवा नियमावली में इसके लिए आवश्यक संशोधन भी कर दिया गया है. शिक्षा विभाग के अपर सचिव गिरिवर दयाल सिंह ने अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी है.

शिक्षा सेवा नियमावली में संशोधन किए जाने के बाद पदाधिकारी खुश हैं, क्योंकि इससे पहले की पहले शिक्षा सेवा नियमावली 2014 में बीएड की अनिवार्यता की गई थी. तब अधिकारियों को 2 साल के परिवीक्षा अवधि में विभिन्न प्रशिक्षण के साथ ही बीएड कोर्स करना अनिवार्य किया गया था. बिहार शिक्षक शिक्षा सेवा (प्रशासनिक) संघ के अध्यक्ष विनोदानंद झा और महासचिव अमित कुमार ने इसके लिए बिहार सरकार को धन्यवाद दिया है.

शिक्षा विभाग के संकल्प के तहत जिला अपीलीय प्राधिकार के 58 पीठासीन पदाधिकारियों का कार्यकाल 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है. शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज ने जानकारी देते हुए कहा कि सभी 38 जिला अपीलीय प्राधिकार में 76 पद सृजित किए गए हैं हालाकि अभी नई नियुक्ति होने में काफी वक्त लगेगा.

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