निर्भया केस में नया मोड़, दोषियों ने फिर चली ये चाल…

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी करने के मामले में  दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हो गई है।  सुनवाई शुरू होते ही तिहाड़ जेल की तरफ से अभी तक की स्टेट्स रिपोर्ट कोर्ट में सौंप दी। विशेष लोक अभियोजक राजीव मोहन ने मामले की वर्तमान स्थिति के बारे में अदालत को अवगत कराया और कहा कि 4 दोषियों में से 3 ने पहले ही अपने कानूनी उपायों को समाप्त कर दिया है।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दोषियों को सात दिन का समय दिया था और वह अवधि समाप्त हो गई है। इसके साथ ही तारीख के रूप में किसी भी अदालत में कोई याचिका लंबित नहीं है। बता दें कि  निर्भया के परिजनों ने दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है।

  • चारों दोषियों में एक मुकेश ने कोर्ट को बताया कि वह वकील वृंदा ग्रोवर की मदद नहीं लेना चाहता। बता दें कि कोर्ट ने मुकेश की कानूनी मदद के लिए वृंदा ग्रोवर को नियुक्त किया है।
  • कोर्ट को बताया गया है कि दोषी विनय शर्मा भूख हड़ताल पर है। वह जेल में खाना नहीं खा रहा है।
  • दोषी मुकेश की अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि अब वे मुकेश की वकील नही हैं। वहीं दोषी विनय के वकील ए पी सिंह ने अदालत को बताया कि विनय 11 फरवरी से भूख हड़ताल पर है। ॉ
  • दोषी पवन के वकील रवि काजी ने अदालत को बताया कि वह अदालत द्वारा दिये गए सात दिन में अपनी क्यूरेटिव पिटीशन दायर नहीं कर सका क्योंकि उसके पास वकील नहीं था। आज उनकी पवन के साथ मुलाकात है और वह क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए तैयार है।

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समाचार एजेंसी एएनआइ से बातचीत में निर्भया की मां ने कहा कि कोर्ट में सुनवाई की कई तारीखें बीत चुकी हैं लेकिन अभी तक नया डेथ वारंट जारी नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वह हर सुनवाई में नई उम्मीद के साथ जातीं हैं लेकिन निराशा हाथ लगती है। दोषियों के वकील हर सुनवाई में नई रणनीति का इस्तेमाल करते हैं। दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह कह नहीं सकती कि आज क्या होगा। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ कोर्ट डेथ वारंट जारी करेगी।

इससे पहले की सुनवाई में तिहाड़ जेल प्रशासन ने कोर्ट को बताया था कि दोषी पवन गुप्ता की तरफ से कहा गया है कि वह किसी वकील की सेवा नहीं चाहता। बता दें कि कोर्ट ने चारों दोषियों के खिलाफ दो बार डेथ वारंट जारी कर चुकी है। दोषियों की याचिकाएं पेडिंग होने की वजह से कोर्ट ने अगले आदेश तक डेथ वारंट पर रोक लगा दी थी।

डेथ वारंट पर रोक लगाने के फैसले को गृह मंत्रालय ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि दोषी फांसी को टालने के लिए कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसलिए निर्भया के गुनहगारों को फांसी जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए। वहीं दोषियों के वकील ने कहा था कि जब तक उनके पास कानूनी विकल्प है तब तक कानूनी प्रक्रिया को पूरी करने के लिए समय दिया जाए।

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