निकाय चुनाव: दूसरा चरण में थम गया प्रचार, दांव पर इन दिग्गजों का स्वाभिमान

लखनऊ. निकाय चुनाव के दूसरे फेज के लिए चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम 5 बजे थम गया। इन 25 जिलों में 6 नगर निगम, 51 नगर पालिका और 132 नगर पंचायतें हैं। दूसरे फेज में होने वाले इस चुनाव के लिए प्रदेश के कई दिग्गजों की साख दांव पर है।निकाय चुनाव: दूसरा चरण में थम गया प्रचार, दांव पर इन दिग्गजों का स्वाभिमान

-राजधानी लखनऊ में भी 26 नवम्बर को वोटिंग होगी। सीएम योगी ने इस बार खुद निकाय चुनाव प्रचार की कमान सम्भाली है। इसके आलावा सभी राजनैतिक दलों ने अपने-अपने तरीके से चुनाव में पूरी ताकत लगाई है। ऐसे में इस बार का निकाय चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।

किन जिलों में है चुनाव
-दूसरे चरण में 25 जिलों में चुनाव होना है। इसमें लखनऊ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, अमरोहा, रामपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अलीगढ़, मथुरा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, इटावा, ललितपुर, बांदा, इलाहाबाद, सुल्तानपुर, अम्बेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, संतकबीरनगर, देवरिया, बलिया, वाराणसी और भदोही शामिल हैं।
-इसमें 6 नगर निगम लखनऊ, गाजियाबाद, अलीगढ, इलाहाबाद, मथुरा, और वाराणसी शामिल हैं।

इन टॉप लीडर्स की प्रतिष्ठा होगी दांव पर
-निकाय चुनाव के दुसरे चरण में भी कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। इसमें पीएम मोदी से लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व सीएम अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यादव जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं।

वाराणसी- वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। यहां से लाखों वोटों से जीत कर नरेंद्र मोदी सांसद चुने गए थे। यहां दूसरे चरण में नगर निगम की एक सीट के लिए मतदान होना है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के कारण यह सीट जीतना बीजेपी के लिए सम्मान की बात बन गई है वहीं, पीएम मोदी की प्रतिष्ठा भी इसे लेकर दांव पर है।

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लखनऊ- यहां से गृहमंत्री राजनाथ सिंह सांसद हैं। ऐसे में उनकी प्रतिष्ठा यहां दांव पर है। 20 साल से अधिक समय से राजधानी के मेयर की सीट पर बीजेपी का कब्जा बरकरार रहा है। ऐसे में यह सिलसिला बनाए रखने की जिम्मेदारी अब बीजेपी के दिग्गजों पर आ गई है।

रामपुर- रामपुर सपा के दिग्गज नेता आजम खान का गढ़ माना जाता है। दूसरी ओर बीजेपी के केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी इसे अपना गढ़ मानते हैं। ऐसे में रामपुर की नगर पालिका सीट पर जीतने के दबाव इन दो दिग्गजों पर होगा।

इटावा और मैनपुरी- इटावा और मैनपुरी सपा परिवार का गढ़ माना जाता है। राजनीति में यहां समाजवादी परिवार का काफी दबदबा रहता है। ऐसे में यहां की नगर पालिका परिषद पूर्व सीएम अखिलेश यादव व उनके पिता मुलायम सिंह यादव के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है।

अलीगढ़- यहां से यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह और उनके बेटे संदीप सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। कल्याण सिंह वर्तमान में राजस्थान के गवर्नर और उनके बेटे संदीप सिंह योगी सरकार में मंत्री हैं। अलीगढ़ कल्याण सिंह का गृह जनपद है और यहां के निकाय चुनावों में सफलता उनके लिए साख की बात है।

सुल्तानपुर- पिछले कई महीनों से सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद वरुण गांधी की पार्टी से नाराजगी की खबरे सामने आती रही है। हालांकि कई बार वरुण गांधी व बीजेपी संगठन इसे नकार चुका है। बावजूद इसके यहां की नगरपालिका सीट जीतना बीजेपी व खुद सांसद वरुण गांधी के लिए प्रतिष्ठा की बात बन गई है।

इलाहाबाद- इलाहाबाद पर मेयर प्रत्याशी का चुनाव भी काफी अहम है। यहां से बीजेपी के मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ की पत्नी अभिलाषा गुप्ता प्रत्याशी हैं। अभिलाषा वहां की वर्तमान मेयर भी हैं। इलाहाबाद बीजेपी के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का भी गृह जनपद है। ऐसे में यहां भी बीजेपी को जीत दिलाना इन दिग्गज नेताओं के लिए चुनौती होगी।

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बहराइच- पिछले आंकड़ों पर गौर करें तो यहां निकाय चुनावों में ज्यादातर सपा व बीएसपी ही हावी रहे हैं, लेकिन इस समय सूबे में बीजेपी की सरकार है और यहां की स्थानीय विधायक अनुपमा जायसवाल प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। ऐसे निकाय चुनाव में दोनों पार्टियों का तिलिस्म तोड़ बीजेपी को जीत दिलाना मिनिस्टर अनुपमा के लिए चुनौती होगी।

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