नानीबाई को उपहार में श्रीकृष्ण ने दिए थे वस्त्र, जन्माष्टमी पर होंगे दर्शन

नानीबाई को उपहार में श्रीकृष्ण ने दिए थे

गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के अगले दिन 15 अगस्त को नंदोत्सव में 500 साल पहले भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नानीबाई के मायरे में उपहार दिए गए वस्त्र के दर्शन होंगे। सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट उज्जैन ने सिंधिया राजवंश की इस धरोहर को आज भी सहेज के रखा है। यह पहला अवसर होगा जब भक्तों को इसके दर्शन कराए जाएंगे।नानीबाई को उपहार में श्रीकृष्ण ने दिए थे

पुजारी अर्पित जोशी ने बताया भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अगले दिन मंदिर में नंदोत्सव मनाया जाता है। माता यशोदा की गोद में बालगोपाल की दुग्धपान करते हुए सुंदर झांकी सजाई जाती है।

इस बार झांकी के साथ मंदिर के गर्भगृह में संरक्षित नानी बाई के मायरे में उपहार स्वरूप दिए गए वस्त्र के दर्शन भी कराए जाएंगे। ट्रस्ट के पास इस दुर्लभ वस्त्र का एक हिस्सा मौजूद है, जो सिंधिया राज परिवार ने दिया है।

इसे एक फ्रेम में लेमिनेशन कर रखा गया है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती के समय भगवान के साथ इस वस्त्र की भी पूजा की जाती है।

भक्तों ने नानीबाई के मायरे की कथा कई बार सुनी होगी, लेकिन यह पहला अवसर होगा जब श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दिए वस्त्रों के अंश का दर्शन कर सकेंगे।

नरसी मेहता की पुत्री है नानी बाई

भागवताचार्य पं.सुधीर पंड्या ने बताया नानीबाई श्रीकृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता की पुत्री है। धर्म कथा के अनुसार विवाह के बाद उनके यहां मांगलिक प्रसंग में मामेरा करने की बारी आई, तो नानीबाई चिंतित हो गई।

उन्होंने पिता से मामेरा करने को कहा, इस पर पिता ने कहा कि द्वारिकाधीश ही मेरी लाज रखेंगे। भगवान पर उनकी अगाध श्रद्धा का ही परिणाम रहा कि श्रीकृष्ण ने सांवरिया सेठ का रूप धर कर नानीबाई के यहां मामेरा किया।

संरक्षित है वस्त्र का हिस्सा

सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट उज्जैन के अध्यक्ष आरआर इंग्ाले ने बताया धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नानीबाई के मायरे में उपहार दिए गए वस्त्र का एक हिस्सा मंदिर में आज भी संरक्षित है।

इसे फ्रेम करके रखा गया है। नित्य इसकी पूजा होती है। पहली बार पुजारी अर्पित जोशी के आग्रह पर इसे नंदोत्सव में भक्तों के दर्शनार्थ रखा जाएगा।

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