नाग-नागिन की प्रेम कहानी का जीवंत रूप है ये ‘प्रेम मंदिर’

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संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर में वैसे तो मंदिर कई हैं। लेकिन एक मंदिर ऐसा भी है जो अनोखा है। अनोखा इसलिए क्योंकि यहां भगवान की नहीं नाग-नागिन की पूजा की जाती है। दिलचस्प यह है कि हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म के अनुयायी भी इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।

मकर संक्रांति के एक दिन पहले लोहड़ी की पूरे देश मची धूमयह मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है। इस मंदिर के बनने के पीछे भी एक रोचक कहानी है। हुआ यूं कि साल 2015 में ग्वालियर के ही ट्रांसपोर्ट नगर में गेट नंबर एक के पास से एक नाग-नागिन का जोड़ा सड़क पार कर रहा था। तभी अचानक बीच सड़क पर एक ट्रक के नीचे आ जाने से नाग की मौके पर ही मौत हो गई। लेकिन नागिन बच गई।

नागिन, नाग के मर जाने के गम में इतनी दुखी थी कि वह सड़क से अलग ही नहीं हुई। घंटों सड़क पर जाम लगा रहा। तब एक सपेरे की मदद से नागिन को वहां से अलग किया गया। आलम यह था कि दूसरे दिन जहां नाग की मृत्यु हुई थी, वहीं नागिन ने भी दम तोड़ दिया। सच्चे प्रेम की आस्था से अभिभूत लोगों ने नाग-नागिन का न केवल हिंदू विधि से अंतिम संस्कार किया। बल्कि सड़क के नजदीक ही नाग-नागिन की मूर्ति स्थापित कर मंदिर भी बनवाया। जिसका नाम रखा गया प्रेम मंदिर।

 

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