नशे के खिलाफ बनी एसटीएफ की कमान अब सीएम को नहीं डीजीपी को देगी रिपोर्ट

- in पंजाब, राज्य

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने हर बिंदु पर पक्ष रखा। उन्‍होंने नशा के मुद्दे सहित बहबल कलां कांड की जांच व रेत खनन सहित सभी मामलों पर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। इसके साथ ही अमरिंदर के सत्ता संभालते ही नशे को खत्म करने के लिए डायरेक्ट सीएम को रिपोर्ट करने वाली स्पेशल टास्क फोर्स अब डीजीपी को रिपोर्ट करेगी।

नशे के खिलाफ बनी एसटीएफ की कमान अब सीएम को नहीं डीजीपी को देगी रिपोर्ट कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में एसटीएफ के एक साल के कामकाज पर संतुष्टि जताई, लेकिन साथ ही इसकी कमान डीजीपी को सौंप दी। सीएम ने कहा, ‘एसटीएफ को अपने ऑपरेशंस चलाने के लिए पुलिस की जरूरत होती है और इसकी अलग से व्यवस्था नहीं की जा सकती।’ इसके साथ ही सरकार ने ड्रग डीलर्स की प्रॉपर्टी को जब्त करने का बिल राष्ट्रपति की मंजूरी को भेज दिया है।

उन्‍हाेंने कहा कि डीजीपी के पास फोर्स होने से अब वे जितनी चाहें फोर्स नशे के खिलाफ ऑपरेशंस चलाने के लिए ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ड्रग डीलर्स को जड़ से खत्म करने के लिए उनकी प्रॉपर्टी को जब्त करने का एक बिल भी पास किया है। इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए गया है।

कैप्टन ने गैंगस्टर्स को तुरंत सरेंडर करने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते तों उन्हें काबू करना उन्हें आता है। उन्होंने बताया कि अब तक 707 गैंगस्टर पकड़े गए हैं।

‘जस्टिस रंजीत सिंह आउटस्टैंडिंग जज’

अकाली दल की ओर से बहबल कलां कांड की जांच कर रहे जस्टिस रंजीत सिंह को आउटस्टैंडिंग बताते हुए कैप्टन ने कहा कि अगर वे विपक्ष के नेता हैं, तो इसका यह मतलब नहीं है कि उनकी प्रतिबद्धता में कोई कमी है। यहां सभी एक दूसरे के रिश्तेदार हैं। उन्होंने बताया कि आयोग की बहबल कलां और बरगाड़ी कांड की रिपोर्ट तैयार है। अन्य धार्मिक ग्रंथों की जांच पूरी होने के बाद उनकी रिपोर्ट टेबल की जाएगी।

राणा ने नैतिकता के आधार पर दिया इस्तीफा

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि रेत की खड्डों के मामले का राणा गुरजीत से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंचाई घोटाले समेत अन्य जितने भी घोटाले हुए हैं, उनके दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जारी रहेगी फ्री बिजली

ट्यूबवेलों पर की जा रही मीटरिंग का जवाब देते कैप्टन ने कहा कि ट्यूबवेलों को दी जा रही फ्री बिजली बंद करने का कोई सवाल ही नहीं उठता, लेकिन भूजल बचाना भी हमारी जिम्मेवारी है। आखिर हम अपनी आने वाली पीढिय़ों को क्या देकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि माझा, मालवा और दोआबा में केवल पायलट के आधार पर ये प्रोजेक्ट लग रहे हैं और किसानों को एकमुश्त पैसा दिया जाएगा। इस पैसे से वे बिल भरें और बचा हुआ पैसा अपने पास रख लें। कैप्टन अमरिंदर ने केंद्र सरकार से भी कहा कि धान की फसल के लिए वह पंजाब की ओर न देखें। हमें पानी बचाने के लिए और फसलें उगाने दें।

पूर्व अकाली-भाजपा सरकार पर बरसे

कैप्‍टन ने 31000 करोड़ के फूड कैशक्रेडिट लिमिट को अपनी सरकार के आखिरी दिन सरकार के खाते में डालने को लेकर अकाली-भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। कैप्टन ने कहा कि पिछली सरकार की वजह से हमें 3240 करोड़ रुपये हर साल अदा करने पड़ रहे हैं। अगर ऐसा न हो तो वे किसानों का कर्ज भी माफ कर सकते की स्थिति में होते और सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाने की स्थिति में भी।

प्रोफेशनल टैक्स पर बोले- कड़वे घूंट पीने पड़ेंगे

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें कड़वे कदम लेने पड़ रहे हैं। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि राज्‍य के बुरे आर्थिक हालातों को ठीक करने के लिए सरकार का सहयोग दें। उन्‍होंने 200 रुपये का प्रोफेशनल टैक्स लगाने के मुद्दे पर कहा कि यह आम लोगों पर कोई बोझ नहीं है ।

यमुना का पानी पंजाब को क्यों नहीं?

कैप्टन ने कहा कि वह किसी पड़ोसी राज्य के खिलाफ नहीं है, लेकिन पंजाब के पास किसी अन्य सुबह को पानी देने का सवाल ही पैदा नहीं होता, जबकि हरियाणा के पास पंजाब के मुकाबले जमीन भी कम है फिर उन्होंने ज्यादा पानी ले रहा है। उन्होंने कहा पानी के बंटवारे में यमुना को बाहर रखा गया।

जल्द लाएंगे एग्रीकल्चर पॉलिसी

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि जल्द ही पंजाब सरकार एग्रीकल्चर पॉलिसी लेकर आ रही है, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी का जो एमएसपी को लेकर बयान आया है, उसका इंतजार किया जा रहा है। क्योंकि अभी तक सेंटर गेहूं और धान पर ही एमएसपी रही है जबकि 23 अन्य फसलों पर भी एमएसपी देनी चाहिए।

कैप्टन ने कहा कि पंजाब के युवा दूसरे देशों में जा कर सेटल हो रहे हैं। हम उनकी सुविधा के लिए हायर एजुकेशन में चाइनीज समेत दूसरे देशों की भाषाओं को भी वैकल्पिक भाषा के तौर पर लागू करना चाहते हैं।

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