धार्मिक के साथ प्रेम के लिए भी मशहूर है मथुरा का कुसुम सरोवर

हमारे देश में ऐसे कई टूरिस्ट स्पोर्ट्स हैं, जिनसे कई कहानियां जुड़ी हुई है. कई कहानियां ऐतिहासिक तो कई पौराणिक है, इन कहानियों को किसी जगह से जोड़कर देखा जाता है. इन कहानियों की वजह से ही कोई जगह मशहूर हो जाती है. उस जगह को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं. ऐसी एक जगह है मथुरा का कुसुम सरोवर जहां पर राधा-कृष्ण मिलने आया करते थे.  धार्मिक के साथ प्रेम के लिए भी मशहूर है मथुरा का कुसुम सरोवर

60 फीट गहरा सरोवर 

उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में स्थित गोवर्धन से लगभग 2 किलोमीटर दूर राधा घाट के पास है ऐतिहासिक कुसुम सरोवर जो 450 फीट लंबा और 60 फीट गहरा है. प्राचीन सरोवर को मध्य प्रदेश के बुंदेला राजा वीर सिंह देव ने 17वीं शताब्दी में बनवाया था. इसके बाद राजा सूरजमल ने इसका जीर्णोद्धार कराकर इसे भव्य सरोवर का स्वरूप प्रदान किया. सरोवर के पश्चिम में राजा सूरजमल के बेटे राजा जवाहर सिंह ने अपने पिता और अपनी तीनों माताओं की याद में एक ऊंचे चबूतरे पर छतरियों का निर्माण करवाया 

राधा-कृष्ण के मिलना का स्थल 

ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण, राधा जी से छुप-छुपकर कुसुम सरोवर पर ही मिला करते थे. एक समय राधा रानी और सारी सखियां भगवान कृष्ण के लिए फूल चुनने कुसुम सरोवर गोवेर्धन ही जाया करतीं थीं. 

ये है खासियतें 

इस सरोवर के चारों तरफ सैंकड़ों सीढ़ियां हैं. इस सरोवर के चारों-तरफ ढेरों कदम के पेड़ हैं और कहा जाता है कि कदम का पेड़ भगवान कृष्ण को बेहद पसंद था और यही वजह है कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से मथुरा-वृंदावन आने वाले पर्यटक कुसुम सरोवर जाना नहीं भूलते. इस सरोवर का पानी तैरने के लिहाज से बेहतर माना जाता है और यहां आने वाले पर्यटक बेहतरीन समय बिता सकते हैं. कुसुम सरोवर के आसपास कई आश्रम और मंदिर भी हैं. साथ ही यहां की शाम की आरती भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है.

कैसे पहुंचे 

मथुरा रेलवे स्टेशन पहुंचकर टैक्सी, ऑटो रिक्शा या प्राइवेट कार के जरिए आसानी से कुसुम सरोवर पहुंचा जा सकता है.

घूमने के लिए बेस्ट टाइम 

आप साल के किसी भी महीने यहां घूम सकते हैं. 

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