दो दिन पहले ही केरल पहुंचा मानसून, भोपाल तक पहुंचने में लगेंगे 15 दिन

- in मध्यप्रदेश, राज्य
भोपाल. दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल के तट पर दो दिन पहले यानी मंगलवार को ही दस्तक दे दी। इसके अलावा मानसून पूर्वोत्तर में भी पहुंच गया है। मप्र में इसके 13 से 15 जून तक पहुंचने का अनुमान है।
दो दिन पहले ही केरल पहुंचा मानसून, भोपाल तक पहुंचने में लगेंगे 15 दिन
मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने बताया कि ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल तट के अलावा मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर-पश्चिम में भी दस्तक दी है। इसमें चक्रवाती तूफान ‘मोरा’ भी सहायक रहा है, जिसकी वजह से बारिश जल्द शुरू हो गई है।’ सामान्य तौर पर केरल तट पर मानसून 1 जून को पहुंचता है। हालांकि इस बार यह अनुमान 5 जून था। मौसम विभाग के मुताबिक केरल के बाद अगले 24 घंटों में मानसून तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप, पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकांश हिस्सों और तमिलनाडु के कुछ भागों में पहुंच सकता है 

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भोपाल में मंगलवार शाम हुई 1 मिमी बारिश से शहरवासियों को गर्मी और उमस से राहत मिली। मौसम का मिजाज बदलने से दिन में पारा 1 और रात में 2 डिग्री लुढ़क गया। बारिश से मौसम में ठंडक घुल गई। राहत भरी खबर यह भी है कि अब तेज गर्मी पड़ने के आसार नहीं हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिन का तापमान नौ तपा के शुरुआती दिनों में अधिकतम पहुंच चुका है। अब अनुमान है कि कुछ दिनों तक यह 40- 41 डिग्री से ऊपर नहीं पहुंच सकता। नौतपा 25 मई से शुरू हुआ था।
 
तेज हवा से कई जगह गिरे पेड़
मंगलवार शाम 3 मिनट के लिए 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। इस वजह से कई जगह पेड़ गिरे। तीन दिन पहले 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चली थी।
यहां गुल रही बिजली
ओल्ड सुभाष नगर, बंजारी कोलार, अशोका गार्डन, चांदबड़, द्वारका नगर, सुभाष काॅलोनी, एअरपोर्ट रोड, सुविध विहार, रेजीमेंट रोड, पीजीबीटी, डीआईजी बंगला, बैरसिया रोड, बारहमहल।
 
भोपाल में 13 मिमी बारिश, प्रदेश के कई जिले भीगे
मंगलवार को राजधानी समेत प्रदेश के कई इलाकों में प्री-मानसून बारिश हुई। उमरिया में सबसे ज्यादा 26 मिमी बारिश हुई। श्योपुर में बारिश का पानी मकानों और दुकानों में भर गया। सिवनी में 25, राजगढ़ में 13 और भोपाल में 13 मिमी बारिश दर्ज की गई। मंगलवार सुबह 8.30 बजे उज्जैन में 11, खजुराहो में 2.7, ग्वालियर में 1.4, जबलपुर में 5.8, नरसिंहपुर में 3.0 मिमी पानी बरसा।
 
डीपी दुबे, मौसम विज्ञानी से सीधी बात
 
देश में मानसून से पहले अच्छी बारिश हो सकती है…
 
क्या मानसून समय से पहले आ गया?
हां। दो दिन पहले और वो भी दो तरफ से। एक केरल की ओर से, जहां से हर साल आता है। और दूसरा पूर्वोत्तर की ओर से। जहां से कभी-कभी आता है।
पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते आने की बात क्या सही है?
बिल्कुल सही है। बंगाल की खाड़ी में उठे तूफान ‘मोरा’ के कारण मानसून के लिए जरूरी सिस्टम पूर्वोत्तर राज्यों की ओर भी बढ़ा है।
क्या इसे मानसून कहेंगे? कहीं ये प्री-मानसून तो नहीं है?
नहीं। ऐसा नहीं है। पूर्वोत्तर राज्यों में अभी जो बारिश हो रही है वह मानसूनी ही है। दरअसल मानसूनी बारिश समझने के 3 मानक होते हैं…
1. ऊपरी एटमोसफेयर में ह्यूमिडिटी बढ़नी चाहिए।
2. दो दिन तक लगातार बारिश होनी चाहिए।
3. इस दौरान तापमान में काफी कमी हो जानी चाहिए।
मौसम विभाग इन मानकों से संतुष्ट होता है, तब मानसून घोषित करता है। इस बार केरल और पूर्वोत्तर दोनों जगहों पर ये क्राइटेरिया फिट बैठ रहा है।
एक ही दिन दो तरफ से मानसून आना नई बात है क्या?
नहीं, पहले भी बंगाल की खाड़ी में मूवमेंट से नार्थ ईस्ट की ओर मानसून बढ़ा है। पर हमेशा ऐसा नहीं होता।
तो पिछली बार ऐसा कब हुआ था?
2002 में। यानी 15 साल पहले। तब पहले पूर्वोत्तर राज्यों की ओर से मानसून दाखिल हुआ था। उसके कुछ दिनों बाद केरल के तट से टकराया था।
दो तरफा मानसून फायदा पहुंचाएगा या नुकसान?
बहुत नफा-नुकसान तो नहीं होगा। पर पूर्वोत्तर में अच्छी बारिश से देश के पूर्वी इलाके खासकर प. बंगाल, ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों को थोड़ी राहत मिलेगी।
क्या इससे अाने वाले सीजन में ज्यादा बारिश होगी?
नहीं, टोटल बारिश से इसका संबंध नहीं है। पर देश के बाकी इलाकों में प्री-मानसून एक्टिविटी बढ़ेगी। यानी इन इलाकों में दोपहर बाद तेज हवाएं, गरज के साथ बारिश होगी। बाकी वर्षों से कुछ ज्यादा।
इसका फायदा किसानों को तो मिल सकता है?
बिल्कुल मिलेगा। क्योंकि बारिश का पानी थोड़ा ही सही, पर जमीन के अंदर तो जाएगा। लेकिन खरीफ की बुवाई तभी शुरू होगी जब पूरा मानसून आ जाए।
तो क्या प्री-मानसून के दौरान किसान बुआई न करे?
बिल्कुल नहीं। क्योंकि जमीन अंदर से बेहद गर्म है। थोड़ी बारिश से उमस और हो जाती है। इससे बोए बीज का बचना मुश्किल हो जाता है। बेहतर यही है कि अभी रुकें। दो-ढाई इंच बारिश के बाद काम शुरू करें।

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