दिमाग से ऐसी निकली तरंगे कि चल पड़ा लकवा झेल रहा इंसान

p1-56052fc67396f_lमेरिका में ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बताया जा रहा है कि 5 साल से लकवा झेल रहा इंसान फिर चलने-फिरने लगा और ऐसा संभव हो सका दिमाग से निकलने वाली तरंगों की वजह से

बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति के रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड)  में चोट की वजह से उसके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। उसके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया था और वो करीब 5 साल से  चलने-फिरने में लाचार था। लेकिन अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के तरंगों को नियंत्रित करने की ऐसी नई प्रणाली विकसित कर ली है, जिससे उसके लकवे की बीमारी ठीक पाना संभव हो सका।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय केव वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी व्यक्ति का मस्तिष्क की तरंगों (ब्रेनवेव्स) की मदद से फिर से चलने लगा जाना, मेडिकल साइंस में एक बड़ी कामयाबी है। लकवाग्रस्त व्यक्ति इलेक्ट्रोइनसेफेलोग्राम (ईईजी) प्रणाली पर आधारित नई तकनीक से चलने में सफल रहा।  इलाज की इस नई तकनीक में सीधे मस्तिष्क के नियंत्रण से पैरों को हरकत में लाने में सफलता मिली।

ईईजी मस्तिष्क की तरंगों को घुटनों के पास लगे इलेक्ट्रोड प्लेट तक पहुंचाता है, जिससे पैरों में हरकत होती है। मानसिक मजबूती का असर तरंगों पर पड़ता है और शारीरिक व्यायाम से मांसपेशियों में मजबूती आती है। 19 हफ्ते के प्रशिक्षण के बाद परीक्षण में हिस्सा लेने वाले व्यक्ति में अपेक्षाकृत ज्यादा सुधार देखा या।

डॉक्टर एन डो के मुताबिक लकवा मारने के कई साल बाद भी मस्तिष्क मजबूत तरंग भेजने में सक्षम हो सका। उनके मुताबिक इस यंत्र को शरीर के अंदर भी लगाने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि शुरूआत में पीड़ित व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक प्रशिक्षण देने की जरूरत होती है।

 

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