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दस फीसद से ऊपर नहीं जाएगी होम लोन की ब्याज दर: HDFC

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले दो महीनों में दो बार ब्याज दरें बढ़ाने का रास्ता साफ कर स्पष्ट कर दिया है कि सस्ते लोन के दिन अब गुजर चुके हैं। देश में सबसे ज्यादा होम लोन देने वाली निजी क्षेत्र की वित्तीय संस्थान एचडीएफसी लिमिटेड की प्रबंध निदेशक रेणु सूद कर्नाड का मानना है कि होम लोन की दरों में कुछ बढ़ोतरी तो निश्चित है लेकिन इससे आवास खरीदने वालों पर कोई असर नहीं होगा। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित नाटकॉन-2018 के दौरान विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन के साथ उन्होंने भारत में होम लोन के भविष्य पर विस्तार से बात की।दस फीसद से ऊपर नहीं जाएगी होम लोन की ब्याज दर: HDFC

अब यह तो सामने है कि रिजर्व बैंक जून और अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में दो बार रेपो रेट बढ़ा चुका है। महंगाई की स्थिति को लेकर जो अनुमान आरबीआइ की तरफ से आ रहे हैं, वे भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। ऐसे में मेरा अनुमान है कि अगले छह महीनों में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों या 50 आधार अंकों (0.25 से 0.50 फीसद) तक की बढ़ोतरी और हो सकती है। लेकिन मैं यह भी बताना चाहूंगी कि जो व्यक्ति होम लोन लेकर घर खरीदता है, वह ब्याज दर में 0.50 या 0.75 फीसद की वृद्धि को लेकर बहुत ज्यादा महत्व नहीं देता है। साथ ही यह भी बताना चाहूंगी कि ब्याज दरों की इतनी बढ़ोतरी तो ग्राहक आसानी से अपने कर्ज चुकाने के समय को बढ़ाकर वहन सकता है। यानी उसकी मासिक किस्त पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं होगा।

क्या इस बात का खतरा है कि होम लोन की दरें फिर से 13-14 फीसद सालाना के स्तर पर चली जाए?

मुझे नहीं लगता है कि हम उस दौर में फिर से जा सकते हैं। मेरा अनुमान है कि होम लोन की दरें अगले दो वषों के भीतर ज्यादा से ज्यादा बढ़कर 10 फीसद तक जाएंगी तो बहुत ज्यादा नहीं है। अभी यह नौ फीसद के नीचे ही हैं। हां, 10-12 वर्ष पहले जिस तरह से होम लोन की ब्याज दर एक समय 7-7.50 फीसद हो गई थी, वहां तक इनका नीचे गिरना भी फिलहाल नहीं लग रहा है। अगर आर्थिक विकास दर आठ फीसद से ज्यादा बनी रहती है तो ब्याज भी कम होगा। साथ ही भारत में हमने देखा है कि जो उपयोग के लिए घर खरीदता है, वह सात-आठ वषों में अपना होम लोन वापस कर देता है।

क्या महंगा होम लोन आवासीय क्षेत्र में मांग को प्रभावित करेगा?

अगर होम लोन की दरें 12-13 फीसद पर पहुंच जाएं तभी इसका कुछ असर आवासीय मांग पर पड़ेगा, जिसकी उम्मीद बहुत कम है। आप यह भी देखिए कि भारत में अपना घर खरीदना अभी भी एक बड़ा संवेदनशील व भावनात्मक मुद्दा होता है। देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर लंबे समय तक अच्छी खासी रहने की उम्मीद है जो आवासीय क्षेत्र में मांग बनाए रखने के लिए जरूरी है। इसके अलावा सरकार के स्तर पर जिस तरह से आवासीय क्षेत्र पर फोकस किया गया है, वह भी घरों की मांग को बनाए रखेगा। हर व्यक्ति को घर देने की योजना को जिस तरह से समग्र तौर पर लागू किया जा रहा है, वह पूरी अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर छोड़ेगा।

सरकार की सब्सिडी योजना से इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि छोटे शहरों और अर्ध शहरी क्षेत्रों में मकान खरीदने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। महानगरों व बड़े शहरों में खरीदार तैयार हैं, लेकिन वे डरे हुए हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं, जैसे परियोजनाओं का लंबे समय तक फंस जाना, कानूनी अड़चन आ जाना, आदि। महानगरों में खासतौर पर दिल्ली राजधानी क्षेत्र में तैयार मकानों की संख्या काफी ज्यादा है जिनकी बिक्री की रफ्तार पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही है। दो बार ब्याज दरें बढ़ाकर रिजर्व बैंक ने कम ब्याज दर का दौर खत्म होने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। होम लोन की ब्याज दरों में वृद्धि हो सकती है लेकिन ब्याज इतना नहीं बढ़ेगा कि लोग आवास खरीदने से बचें।

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