जियोलॉजी व‌िभाग को मिली महिला टीचर,55 साल बाद

images (2)इसे महिला सशक्तीकरण कहें या बदलाव की बयार कि लखनऊ विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग में लगभग 55 साल के बाद किसी स्थायी महिला टीचर की नियुक्ति की गई है। डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव को 1943 में स्थापित इस विभाग की दूसरी महिला टीचर  बनने का अवसर मिला है। 
इससे पहले 1950 के दशक में यहां डॉ. नीरजा अवस्थी नाम की शिक्षिका हुआ करती थीं, लेकिन वह भी कुछ समय बाद दूसरी जगह चली गईं। उसके बाद कभी किसी महिला की नियुक्ति नहीं हुई। वर्तमान में विभाग में शिक्षकों के 15 में से 11 पद भरे हुए हैं, जबकि एक शिक्षक को नियुक्ति पत्र तो जारी हो चुका, लेकिन जॉइनिंग बाकी है। 

इन शिक्षकों में डॉ. पूर्णिमा इकलौती महिला हैं, जिन्हें विवि ने इसी साल फरवरी में अपॉइंट किया है। हालांकि, उन्हें यह नियुक्ति 56 वर्ष की उम्र में मिली जबकि उनके पास मात्र छह साल का ही सेवाकाल बचा है।‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि इस विभाग में फील्ड वर्क काफी अधिक होता है। 

इसीलिए वर्षों से विवि प्रशासन व विभाग के पुराने शिक्षकों की मानसिकता रही कि एक महिला यहां कार्य करने के लिए उचित नहीं। जबकि वास्तविकता यह है कि इसी विभाग से निकली छात्राएं आज जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सहित कई संस्थानों में कार्यरत हैं। 

उनका कहना है कि यदि ऐसी ही मानसिकता है तो इस विभाग में छात्राओं को पढ़ाया ही क्यों जाता है। हालांकि, डॉ. पूर्णिमा का यह भी मानना है कि ऐसी मानसिकता रखने वाले शिक्षक एक-एक कर यहां से सेवानिवृत्त होते गए। 

डॉ. पूर्णिमा का लक्ष्य है कि वह अगले छह साल में खुद को इस तरह साबित करें कि भविष्य में जब कोई और इस विभाग में नियुक्ति के लिए आवेदन करे तो कोई सिर्फ इसलिए सवाल न उठा सके कि वह एक महिला है। 

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