जानिए भगवान भोलेनाथ ने इन 19 अवतारो की खास बाते

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पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान भोलेनाथ ने 19 अवतार लिए हैं। यह अवतार उन्होंने तब लिए, जब धरती या देवताओं पर संकट आया। इन अवतारों में उन्होंने कई मायावी लीलाएं कीं। जो वैदिक ग्रंथो में विशेषतौर पर शिवमहापुराण में विस्तार से उल्लेखित हैं।

1) वीरभद्र अवतार: शिव का यह अवतार माता सती के देह त्याग करने के बाद लिया था। वह काफी दुखी और क्रोधित थे। और उन्होंने सती के पिता दक्ष का सिर शरीर से अलग कर दिया था।
 
2)- भैरव अवतार: शिव महापुराण में वर्णित है कि भगवान शंकर ने कालभैरव के अवतार में अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को काट दिया था। ब्रह्मा का पांचवां सिर काटने के कारण भैरव को ब्रह्महत्या का दोष लगा। काशी में भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। यही कारण है कि शास्त्रों में काशीवासियों के लिए भैरव की भक्ति अनिवार्य बताई गई है।
3) हनुमान: भगवान शिव का हनुमान अवतार सभी अवतारों में श्रेष्ठ माना गया है। इस अवतार में भगवान शंकर ने एक वानर का रूप लिया था। इस रुप में शिव यानी हनुमानजी भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं।
4) वृषभ अवतार: इस अवतार में भगवान शंकर ने विष्णु पुत्रों का संहार किया था।
5) पिप्पलाद अवतार: शनि पीड़ा का निवारण पिप्पलाद की कृपा से ही संभव हो सका। शिव महापुराण के अनुसार एक बार पिप्पलाद ने देवताओं से पूछा, क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया शनिग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया।
 
श्राप के प्रभाव से शनि उसी समय आकाश से गिरने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनि को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक किसी को कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है। इस अवतार के बारे में स्वयं ब्रह्माजी ने बताया था कि पिप्लाद भगवान शिव के ही अवतार हैं।

 

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