जानिए प्यार क्या होता है और कैसे होता है

- in जीवनशैली

एक अहसास का नाम है प्यार, जो हर इंसान को होता है। इसे लेकर प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो ने एक थ्योरी दी, नीड हैरारकी। इसके मुताबिक जब किसी व्यक्ति की भौतिक जरूरतें पूरी हो जाती हैं तो उसे प्यार और बिलॉन्गिंनेस (के साथ रहकर सुख प्राप्त करना) की जरूरत महसूस होती है। यही है प्यार की साइकोलॉजी। वहीं प्यार की ट्राईंग्युलर थ्योरी देने वाले अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट रॉबर्ट स्टर्नबर्ग की नजर में आदर्श प्यार वह है, जिसमें आत्मीयता, जुनून और प्रतिबद्धता शामिल हो। ये तीनों गुण एक साथ कम मिलते हैं, लेकिन अलग-अलग गुणों के साथ मिलकर प्यार के विभिन्न रूप इन्हीं से बनते हैं।जानिए प्यार क्या होता है और कैसे होता है

प्यार के लिए जिम्मेदार है एंडॉर्फिन नामक हार्मोन, जो भावनाओं पर नियंत्रण रखता है। जैसे ही आंखों को कोई पसंद आता है, संदेश दिमाग तक पहुंचता है और यहां एंडॉर्फिन हार्मोन सक्रिय हो जाता है। कुछ और केमिकल्स भी हैं, जो प्यार को परवान चढ़ाते हैं। इनमें सेरोटोनिन (मानसिक शांति देता है), डोपामाइन (सुख का अहसास कराता है) और ऑक्सीटोसिन (उत्तेजना बढ़ाता है) शामिल हैं। अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट जिक रूबिन के मुताबिक रोमैंटिक लव तीन चीजों से मिलकर बनता है: लगाव, देखभाल और आत्मीयता। लगाव आपको उससे होता है, जिसकी आप परवाह करते हैं। केय¨रग के जरिए आप उस शख्स की खुशियों का ख्याल रखते हैं।

वहीं आत्मीयता दो लोगों के बीच विचार और प्यार के आदान-प्रदान को व्यक्त करती है। जब तक ये तीन बातें किसी रिश्ते में नहीं आतीं, उसे लाइकिंग यानी पसंद की श्रेणी में माना जाएगा। हवाई यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजिस्ट इलियेनी हेटफील्ड कहती हैं, पैशनेट लव यानी तीव्र महत्वाकांक्षा, अनुराग के साथ एंग्जाइटी और सेक्सुअल अट्रैक्शन। यदि ये चीजें पूरी नहीं हों तो ऐसा प्यार जल्द ही छूमंतर हो जाता है। लेकिन यदि एक-दूसरे के प्रति आदरभाव, भरोसा और अनुराग बढ़े तो यह कम्पैशनेट लव में परिवर्तित हो जाता है। ये प्यार का ऐसा रूप है, जहां परस्पर समझदारी के साथ एक-दूसरे के प्रति समर्पित हुआ जाता है।

शादी के बाद प्यार कम नहीं होता, लेकिन परिपक्व न हो पाने के कारण पूरा नहीं हो पाता। यही वजह है कि प्री-मैराइटल काउंसलिंग में सलाह दी जाती है कि शादी के बाद के पांच साल एक-दूसरे को समझने और परिस्थितियों में ढालने पर लगाएं। प्यार में कमी लगने का एक कारण है पैशनेट लव। इसमें प्यार तीव्र गति से उबाल की तरह आता है और अमूमन छह महीने से 30 महीने तक रहता है। इस बीच प्यार को सही दिशा मिली तो ठीक, वरना दूरी आना स्वाभाविक है। शादी के बाद की जिम्मेदारियां निभाते हुए पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम नहीं बिता पाते। ऐसे में एक-दूसरे को समय जरूर दें।

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