जानिए.. क्यों? पोर्न फिल्मों को ‘ब्लू फ़िल्म’ और वेश्याओं के इलाकों को ‘रेड लाइट एरिया’ क्यों कहते हैं?

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एक आंकड़े के मुताबित विश्व भर में तकरीबन 70 फीसदी लोग पोर्न देखते हैं या देख चुके हैं। पोर्न फिल्मों का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है। पोर्न फिल्मो को जितना पोर्न फ़िल्म के नाम से जाना जाता है उससे कहीं अधिक उसे “ब्लू फ़िल्म” कहा जाता है। लेकिन इन फिल्मों को ब्लू फिल्म क्यों कहा जाता है? ये बहुत कम लोगों को ही पता होगा! ठीक ऐसा ही एक और शब्द है, जिसे आम तौर पर लोग सुनते या बोलते आ रहे हैं पर उसे वो क्यों कहते हैं उन्हें खुद नही पता। “रेड लाइट एरिया” … वेश्यावृत्ती का वो इलाका जहाँ इसका कारोबार लगभग खुलेआम फलता फूलता है। पर इस इलाके को ‘रेड लाइट एरिया’ क्यों कहते हैं शायद ही पता होगा किसी को। हम बताते हैं…जानिए.. क्यों? पोर्न फिल्मों को ‘ब्लू फ़िल्म’ और वेश्याओं

१९२० के आसपास से इन पोर्न फिल्मो का कारोबार चल रहा है। इन फिल्मो को सस्ते बजट से बनाया जाता था। ब्लैक एंड वाइट फ़िल्मों में जिन ‘रील्स’ का इस्तेमाल होता था, वो महंगी होती थीं, जब ज़्यादा लम्बे समय तक उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जाता था तो उनमें नीले रंग के कुछ शेड आ जाते थे।  पोर्न फ़िल्म बनाने वाले उन रील्स को हॉलीवुड से सस्ते दाम में खरीद कर, पोर्न फ़िल्म शूट करते थे। जिससे वो फ़िल्में हल्की नीली दिखाई पड़ती थी और इसलिए लोग उसे ‘ब्लू फ़िल्म’ कहने लगे। हालाँकि ब्लू फिल्मों का कारोबार अब इतना व्यापक और बड़े बजट का हो गया है, अच्छी रील्स इस्तेमाल होने लगी हैं, लेकिन लोग आज भी उसे ‘ब्लू फ़िल्म’ ही कहते आ रहे हैं!

ब्लू फ़िल्म का सम्बंध ५०-६० साल पहले खत्म हो चुके पश्चिमी देशों के ‘ब्लू लॉ’ से भी है। ‘ब्लू लॉ’ के अंर्तगत कई चीज़ें आती थीं, जैसे रविवार को कोई काम नहीं हो सकता था, शराब की अधिक बिक्री पर पाबंदी और पोर्न फ़िल्मों की शूटिंग पर भी इसके हस्तक्षेप थे। माना जाता है कि ‘ब्लू लॉ’  की वजह से भी लोग इन फिल्मों को ‘ब्लू फ़िल्म’ कहा जाने लगा!

एक कारण ये भी है कि साल १९७९ में बनी पहली अडल्ट फ़िल्म ‘ब्लू मूवी’ में काफ़ी अश्लील सीन थे, जो टेक्निकल खराबी की वजह से नीले रंग का दिखाई पड़ रहा था. ये फ़िल्म अमेरिका के कई सिनेमाघरों में चली और तब से ऐसी फ़िल्मों का नाम ‘ब्लू फ़िल्म’ पड़ गया.

रेड लाइट :

साल १८९४ में अमेरिका के Amsterdam में Red Light District नाम का इलाका था. यहां खासतौर से वैश्याओं घर में लाल रंग की लाइटें लगाया जाता था। ताकि वैश्याओं के घर इलाको के बाकी घरों या दुकानों से अलग दिख सकें। लाल रंग प्यार और कामुकता का प्रतीक होता था और दूर से देखने में सबसे ज़्यादा चमकता था. उस समय जब इंटरनेट नहीं होता था, तो यही तरीका अपनाया जाता था लोगों को अट्रैक्ट करने का।

कई लोगों का मानना है कि वैश्याओं के घर में कई वैश्याएं S. Transmitted Diseases (STD) से ग्रसित होती थीं, जिस वजह से उनके शरीर में लाल दाग, प्राइवेट अंगों में सूजन होती थी. ये देख कर ग्राहकों की इच्छा खत्म हो जाती ​थी, इसलिए वहां लाल लाइटें लगा दी गई थीं. इससे शरीर पर दाग और सूजन छिप जाती थी और लाल रंग में इच्छा और बढ़ जाती थी।

 

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