जानिए किसकी रक्षा के लिए देवी-देवता ने पशु-पक्षियों को चुना अपना वाहन…

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अगर आप हिंदू धर्म से तालूकात रखते हैं तो इतना तो जानते हीं होंगे कि हिंदू धर्म में प्रत्येक देवी-देवता का अपना एक वाहन है, जिसकी वो सवारी करते हैं। लेकिन क्या आपने कभा सोचा है कि आख़िर सभी देवी-देवता वाहन की सवारी करते क्यों हैं। क्यों इन्हें इन वाहनों की ज़रूरत पड़ी। ज्यादातर लोगों का उत्तर न में होगा। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि देवी-देवताओं के वाहनों के होने की असली वजह।

माना जाता है कि देवी-देवाताओं के इन वाहनों की पूजा से भी उतना ही फल प्राप्त होता है जितना कि इन्हें धारण करने वाले प्रभु की। इसलिए आपने कई बार भक्तों के द्वारा इन वाहनों की पूजा किए जाते हुए देखा होगा। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इन वाहनों को उसे धारण करने वाले देवी-देवता से भी जोड़ा गया है। कहते हैं जिस वाहन का जैसा स्वभाव होता है, वैसा ही स्वभाव उसे धारण करने वाले देवी-देवता का भी।

भगवान शिव नंदी बैल की सवारी करते हैं। नंदी बैल को आस्था और शक्ति का प्रतीक माना गया है। कहते हैं कि शिव जी भी ऐसे ही स्वभाव के हैं। वह उनमें आस्था रखने वाले भक्तों की मदद जरूर करते हैं।

माता दुर्गा शेर की सवारी करती हैं। शेर को शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि मां दुर्गा का स्वभाव भी ऐसा ही है। ठीक यही बात गणेश जी व अन्य पर भी लागू होती है।

कुछ मान्यताओं के अनुसार देवी-देवताओं का पशु-पक्षियों को अपने वाहन के रूप में इस्तेमाल करने की एक वजह प्रकृति की रक्षा भी बताई गई है। कहा जाता है कि यदि देवी-देवताओं ने इन पशुओं व पक्षियों को अपना वाहन नहीं बनाया होता तो इनके ऊपर हिंसा बढ़ सकती थी। माना जाता है कि देवी-देवताओं के द्वारा इन्हें धारण करने से लोगों में इनके प्रति आस्था पैदा हुई और इनकी महत्ता पता चली। कहा जाता है कि विद्वानों ने लगभग प्रत्येक पशु-पक्षी को देवी-देवाताओं से जोड़कर उनकी रक्षा का गुप्त संदेश दिया है।

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