जानिए आपकी कुंडली के किस भाव में विराजमान है शनि देव

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शनि देव के प्रकोप से हर कोई बचना चाहता है और हर कोई इसके उपाय भी ढूंढ़ते हैं और चाहते हैं कृपा बनी रहे लेकिन कहीं ना कहीं उनका क्रोध हमारे सिर चढ़ ही जाता है. ये तो आप जानते ही हैं कि शनि देव को प्रसन्न करना आसान नहीं है बल्कि बहुत ही मुश्किल काम होता है. अगर आपकी कुंडली में शनि विराजमान हैं तो उनके क्रोध से आपको कैसे बचना है ये  हम आपको बताने जा रहे हैं जिसे आप भी अपना सकते हैं. जानिए किस तरह शनि का प्रभाव आपके जीवन पर असर करता है और आप किस तरह इस असर से प्रभावित होते हैं.जानिए आपकी कुंडली के किस भाव में विराजमान है शनि देव

* जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि प्रथम भाव में है, वह व्यक्ति सुखी जीवन जीने वाला होता है. अगर इस भाव में शनि अशुभ फल देने वाला है तो व्यक्ति रोगी, गरीब और गलत काम करने वाला हो सकता है.

* अगर शनि दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति लालची हो सकता है. ऐसे लोग विदेश से धन लाभ कमाने वाले होते हैं.

* तृतीय भाव में शनि का होना ये बताता है कि व्यक्ति संस्कारी, सुंदर शरीर वाला थोड़ा आलसी हो सकता है.

* जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में है, वह जीवन में अधिकतर बीमार और दुखी रहता है.

* कुंडली में पंचम भाव का शनि हो तो व्यक्ति दुखी रहता है और दिमाग से संबंधित कामों में परेशानियों का सामना करता है.

* जिस व्यक्ति की कुंडली के छठे भाव में शनि है, वह सुंदर, साहसी और खाने का शौकीन होता है.

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