जवाहर तापीय परियोजना- सरिया चोरों, खजाने के डाकूओं को बचाने में जुटे अफसर और भाजपा प्रवक्ता

#जवाहर तापीय परियोजना के चोरों पर नही हुयी अब तक कोई कारवाई.

#कारवाई के नाम पर बस तबादला, योगी की आंख में भी धूल झोंकने की कोशिश.

#सरिया चोरी प्रकरण की जिला प्रशासन द्वारा जांच की प्रथम रिपोर्ट शासन को भेजी गयी.  

#शासन की मंशा और जिला प्रशासन की रिपोर्ट को दरकिनार करने में जुटा बिजली विभाग.

#जिला प्रशासन की रिपोर्ट में दोषी होने के बाद भी गुप्ता व जेई को बचाने के लिए की जा रही विभाग में लाबिंग.

#यूएस गुप्ता को बचाने में एक भाजपा प्रवक्ता सहित कुछ अफसरों के शामिल होने की जानकारी.

#कार्यवाही न करने को लेकर प्रबंध निदेशक पर बनाया जा रहा दबाव.

#बिजली विभाग के जिम्मेदारों द्वारा पूरे प्रकरण की शुरू से की जा रही लीपापोती.

लखनऊ : शुचिता और सुशासन के नाम पर सत्ता में आयी भाजपा सरकार में चोरों और डाकूओं को बचाने में आला अफसरान से लेकर खुद पार्टी के प्रवक्ता तक जुट गए हैं. जवाहर तापीय परियोजना में चोरी और डाके के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों की चोट पहुंचाने वाले जीएम यूएस गुप्ता और जेई सुरेंद्र को बचाने गजब की दुराभिसंधि देखने को मिल रही है. सीधे मुख्यमंत्री की निगाह में आए इस सरकारी खजाने की लूट के मामले में अब तक कारवाई के नाम पर महज दोषियों को उनके पद से हटाया गया है. लूटमारों के गिरोह की तरह काम कर रहे जवाहर तापीय परियोजना के जिम्मेदारों पर आपराधिक कृत्य साबित कर कारवाई की अनुशंसा करने वाले जिला प्रशासन की रिपोर्ट को दरकिनार कर घोटलेबाज के अभिभावक उन्हें बचाने के लिए सारे पैंतरे बदल रहे हैं.

Loading...

जनशिकायत पोर्टल पर आई शिकायतों के निस्तारण का मसला हो या फिर मनोरंजन विभाग के कर्मचारियों के समायोजन का सब में विभागीय अफसरों की मनमानी सामने आई और मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेशों को भी ठेंगा दिखाने का काम किया गया. अब कुछ ऐसा ही बिजली बिभाग में देखने को मिल रहा है जहां जवाहरपुर की सरिया चोरी के प्रकरण में जिला प्रशासन की प्रथम जांच रिपोर्ट में संलिप्त पाए जाने के बावजूद दोषी अफसर यूएस गुप्ता और जेई सुरेन्द्र कुमार को बचाने की कवायद की जा रही है.

पिछले दिनों एटा जनपद में जवाहरपुर तापीय परियोजना में इस्तेमाल होने वाली सरिया की चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा वहां के एसडीएम के द्वारा किया गया. सरिया चोरी के इस पूरे प्रकरण में “अफसरनामा” ने विभागीय संलिप्तता का भी मुद्दा उठाया तो शासन भी हरकत में आया और मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई.

ताजा जिला प्रशासन और शासन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एटा के जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने अपनी जांच में यूएस गुप्ता और सुरेन्द्र कुमार की संलिप्तता को पाते हुए अपनी प्रथम रिपोर्ट शासन को भेज दी है. शासन द्वारा इस फाईल पर कार्यवाही हेतु बिजली विभाग के जिम्मेदारों के पास भेज दिया है. लेकिन उर्जा विभाग में शीर्ष पर बैठे अधिकारी अन्य विभागों की तरह ही इस प्रकरण में शासन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा और निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए कोई कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं.

जानकारी में तो यह भी है कि यूएस गुप्ता को बचाने के लिए कुछ अफसर लाबिंग करते हुए प्रबंध निदेशक पर दबाव बनाये हुए हैं. ऐसे में यदि ये अफसर अपने इन मंसूबे में कामयाब हो जाते हैं तो जमीनी स्तर पर दिलेरी दिखा और प्रलोभन में ना आने वाला वह अफसर कितना हतोत्साहित होगा जिसने इस सिंडिकेट का खुलासा किया, यह समझा जा सकता है. अब इस पूरे प्रकरण में विभाग और शासन के कदमों का इंतजार है.

इसके अलावा बताते चलें कि यूएस गुप्ता को जवाहरपुर परियोजना का जीएम बनवाने में कुछ विभागीय अधिकारियों के अलावा एक बीजेपी के प्रवक्ता का भी नाम सामने आया था. सियासी रसूख और बिजली विभाग में शीर्ष पर बैठी अफसरशाही की मेहरबानियों के चलते यूएस गुप्ता हरदुआगंज में बिना स्वीकृत पद के ही अतिरिक्त प्रभार लेने में कामयाब रहा था. लेकिन जब इस सवाल को “अफसरनामा” द्वारा प्रमुखता से उठाया गया तो दूसरे ही दिन यूएस गुप्ता के पास से यह प्रभार जिम्मेदारों ने हटा लिया.

इसी तरह एटा की सरिया चोरी के इस प्रकरण का खुलासा होने के बाद भी जीएम यूएस गुप्ता और जेई सुरेन्द्र कुमार को कई दिनों तक वहीँ तैनात रखा गया था. वहीं चेयरमैन आलोक कुमार के भेजे गए जांच अधिकारी सुबीर चक्रवर्ती भी पूरे प्रकरण की जांच के नाम पर लीपापोती करके लौट आये थे.  लेकिन जब “अफसरनामा” ने यूएस गुप्ता और सुरेन्द्र कुमार की तैनाती को लेकर सवाल खडा किया कि ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे होगी ? तब यूएस गुप्ता को जवाहरपुर से हटा कर निदेशालय से अटैच किया गया लेकिन इंजीनियर सुरेन्द्र कुमार की तैनाती वही रही. जब दुबारा यह सवाल उठा तब इंजीनियर को भी वहां से हटाकर सोनभद्र तैनात कर दिया गया.

ऐसे में अफसरों की इस तरह की लीपापोती के पीछे की वजह सियासी है या उनका कुछ व्यक्तिगत इंटरेस्ट यह भी जांच का विषय है और उम्मीद है कि देर सबेर शासन इसको भी संज्ञान में जरूर लेगा. इसके आलावा यूएस गुप्ता को बचाने के लिए विभाग के ही कुछ अफसरों द्वारा की जा रही लाबिंग का भी संज्ञान शासन को गंभीरता से लेना चाहिए. अन्यथा यूएस गुप्ता की जांच भी बीएस तिवारी की जांच बन के रह जाएगी जिसमें तत्कालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल ने जांच पर जांच बैठाकर मामले को रफा-दफा कर दिया था.

साभार

अफसरनामा डाट काम

वाह रे यूपी का बिजली विभाग, अजब खेल व गजब कारनामें

जवाहर बिजली गिरी जीएम यूएस गुप्ता पर, हटाए गए

कोयले से भी काली हैं जीएम यूएस गुप्ता और जेई सुरेंद्र की कारस्तानियां

एटा की जवाहर परियोजना की सरिया चोरी में जीएम गुप्ता और जेई सुरेंद्र की मिली भगत की बात आ रही सामने  

वाह रे बिजली विभाग के कर्णधार, विभाग में अजब खेल और गजब कारनामे

आगे पढ़िए….US Gupta को GM जवाहरपुर…बनवाने के पीछे कौन  ?  

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com