जवाहरपुर सरिया चोरी : एटा पुलिस का चार्जशीट में खेल, तो प्रमुख सचिव उर्जा की SIT जांच का पता नहीं

#जिला प्रशासन की रिपोर्ट में शामिल विभाग के 4 अफसरों से पुलिस ने नहीं की पूछताछ.

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#घटना की मानिटरिंग सीएम सचिवालय से तब हुआ यह हाल, रिपोर्ट में अंतर्राज्यीय दुजाना गैंग का भी नाम इसमें शामिल.   

#एटा पुलिस के तत्कालीन एसएसपी आशीष तिवारी पर भी उठ रहे सवाल.

#आखिर कहाँ गया प्रमुख सचिव ऊर्जा अलोक कुमार का SIT जाँच का पत्र.   

लखनऊ : 10 सितम्बर 2018 को एटा जनपद की जवाहरपुर बिजली परियोजना में हुई करोड़ों की सरकारी माल की डकैती का मामला अंततः लालफीताशाही और धनबल का शिकार हो गया. एटा के तत्कालीन एसएसपी आशीष तिवारी जोकि तब पूरे मामलो को खुद के द्वारा मानिटर और वीकली समीक्षा किये जाने की कसमें खाते रहे, उनकी देखरेख का आलम यह था कि उनकी पुलिस रिपोर्ट तो दाखिल कर दी लेकिन उन विभागीय आरोपियों का बयान लेना उचित नहीं समझा. इस तरह सरकारी माल की लूट पकड़ने वाले अधिकारियों की मंशा पर पानी फेरते हुए पुलिसिया चार्जशीट तैयार कर असली गुनहगारों को बचाने का रास्ता खुद पुलिस ने साफ कर दिया. पुलिस तो पुलिस थी खुद विभाग के मुखिया अलोक कुमार ने इस पूरे प्रकरण की SIT जांच के लिए एक पत्र लिखा था जिसका कि आजतक पता नहीं चल सका है और वह कार्यवाही भी दिखावा मात्र साबित हुई. फिलहाल पूरे मामले में अलोक कुमार के ढीलेपन और एटा पुलिस और तत्कालीन एसएसपी आशीष तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

ईमानदार मुख्यमंत्री योगी और सुशासन के पहरुए ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की आंख में पुलिस और बिजली विभाग के शातिर धूल झोंकने मे कामयाब हो गए लगते हैं. “अफसरनामा” की पड़ताल में सामने आया है कि बिजली विभाग के दोषी पाए इंजीनियरों व कर्मचारियों से पुलिस ने चार्जशीट तैयार करते समय पूछताछ तो दूर बयान तक दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा था. फोन पर मामले के सूत्रधारों ने इस खेल को खुद कबूल किया था.

उच्च पदस्थ सूत्रों की यदि मानें तो इस प्रकरण में एटा पुलिस धनबल के प्रभाव में आ गयी थी. वैसे तो यह जांच का विषय है लेकिन धनबल के इस खेल में तत्कालीन एसएसपी आशीष तिवारी की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता जिसके चलते गुनहगारों को बचाने का काम किया. तब प्रमुख सचिव ऊर्जा द्वारा प्रकरण की SIT जांच हेतु एक पत्र प्रमुख सचिव गृह को भेजा गया लेकिन न तो अलोक कुमार और न ही उनके जिम्मेदार अफसर इस सम्बन्ध में कुछ बोलना चाहते हैं कि SIT जांच कहाँ तक पहुंची और इसका क्या हुआ, क्या इसमें भी एटा पुलिस की ही तरह खेल हुआ इसका पता नहीं चल सका है. स्थानीय सूत्र बताते हैं कि चोरों के इस गैंग का मनोबल एकदम ऊँचा है और अब वे फिर से स्थान बदलकर सक्रिय होना शुरू कर दिये हैं.

मामले के दोषी जेई सुरेंद्र कुमार जिसे विभाग ने जवाहरपुर से हटा अनपरा भेज दिया था उससे पुलिस ने चार्जशीट में बयान तक नहीं लिया. एक दूसरे एक्जक्यूटिव इंजीनियर कुमार गौरव जिनको विभाग ने जवाहरपुर से हटाकर मुख्यालय पर तैनात कर दिया था उससे भी पुलिस ने पूछताछ नहीं कर सकी. इसके अलावा सरिया चोरी में सरकारी लूट के हिस्सेदार बिजली विभाग के अन्य रसूखदारों को भी पुलिस ने विवेचना तक मे शामिल नहीं किया है. सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण को मैनेज करने में नीचे से ऊपर तक खूब धनबल का प्रयोग हुआ है जिसका प्रभाव तत्कालीन जिले के पुलिस मुखिया आशीष तिवारी तक भी पहुचने की जानकारी है. विडंबना यह है कि ऐसा तब हुआ जब इस पूरे प्रकरण को खुद मुख्यमंत्री सचिवालय मानिटर कर रहा था.

बताते चलें कि 10 सितम्बर 2018 को एटा जनपद में जवाहरपुर तापीय परियोजना में इस्तेमाल होने वाली सरिया की चोरी का खुलासा एसडीम महेंद्र सिंह तंवर द्वारा किया गया था. जिसमें जिला प्रशासन द्वारा इस पूरे खेल में  विभागीय संलिप्तता के अलावा एक बड़े अन्तर्राज्यीय सिंडिकेट के शामिल होने की भी बात कही गयी थी. सरिया चोरी के इस पूरे प्रकरण में विभागीय संलिप्तता का मुद्दा “अफसरनामा” ने उठाया था जिसके बाद शासन भी हरकत में आया और मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई थी. चोरी की इतनी बड़ी घटना में विभागीय संलिप्तता की बात सामने आने के बाद विभाग ने प्रथम दृष्टया संलिप्त अधिकारी को यथोचित सजा भी दे चुका है.

सरिया चोरी के इस प्रकरण की मानिटरिंग खुद मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा किये जाने और विशेष सचिव मुख्यमंत्री द्वारा इस सम्बन्ध में डीएम एटा को सख्त निर्देश  दिए जाने के बाद जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट तो शासन को भेज दिया था जिसके आधार पर विभाग ने उन दोषी अफसरों पर कार्यवाही भी की लेकिन पुलिस प्रशासन पर मुख्यमंत्री सचिवालय के इस दिशा निर्देश का कोई असर नहीं हुआ, और वह मामले की तह तक न जाकर केवल रफा दफा करने में लगी रही. सात महीने बीत जाने के बाद भी एटा पुलिस का यह रवैया योगी सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखाने वाला रहा. पुलिस की जांच में की जा रही देरी और दोषी विभाग के अफसरों से पूछताछ न किया जाना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है. उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण में जिला पुलिस को धनबल से मैनेज किया गया और जांच को कमजोर किया गया.

सरिया चोरी के इस प्रकरण में सरगना US Gupta को बचाने के लिए शुरू में विभाग द्वारा लीपापोती की गयी और बाद में पुलिस ने किया. तब इस प्रकरण में तत्कालीन परियोजना प्रबंधक US Gupta को पूर्व एमडी अमित गुप्ता ने जवाहरपुर से हटाकर मुख्यालय पर स्थानांतरित कर दिया था. जोकि अब परीछा अपने ही समकक्ष के साथ अटैच है. अटैच होने के बाद US Gupta मेडिकल लीव पर चला गया और पूरे मामले को मैनेज करने के लिहाज से अपने आकाओं जोकि इसकी जवाहरपुर तैनाती के मददगार थे के दरवाजे पर दस्तक देने लगा. इसके अलावा बता दें कि यूएस गुप्ता को जवाहरपुर परियोजना का जीएम बनवाने में कुछ विभागीय अधिकारियों के अलावा एक बीजेपी के प्रवक्ता का भी नाम सामने आया था. सियासी रसूख और बिजली विभाग में शीर्ष पर बैठी अफसरशाही की मेहरबानियों के चलते यूएस गुप्ता जवाहरपुर के साथ ही साथ हरदुआगंज में बिना स्वीकृत पद के ही अतिरिक्त प्रभार लेने में कामयाब रहा था. लेकिन जब इस सवाल को “अफसरनामा” द्वारा प्रमुखता से उठाया गया तो दूसरे ही दिन यूएस गुप्ता के पास से यह प्रभार जिम्मेदारों ने हटा लिया.

साभार

अफसरनामा डाट काम

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