जर्मनी ने तोड़कर रख दी पाकिस्तान की पूरी उम्मीद, चांसलर एगेंला मर्केल की अध्यक्षता वाले…

जर्मनी ने पाकिस्तान के एक अनुरोध को ठुकराकर उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने जर्मनी से अपनी पनडुब्बियों को और ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन (एआईपी) सिस्टम देने का अनुरोध किया था लेकिन जर्मनी ने मना कर दिया. जर्मनी की चांसलर एगेंला मर्केल की अध्यक्षता वाले सिक्योरिटी पैनल ने ये फैसला लिया है.

मामले से जुड़े लोगों ने बताया, जर्मनी की सिक्योरिटी काउंसिल ने अपने फैसले से पाकिस्तानी दूतावास को 6 अगस्त को ही अवगत करा दिया है. पाकिस्तान ने जर्मनी से एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन सिस्टम (AIP) मांगा था ताकि वह अपनी पनडुब्बियों को रिचार्ज कर सके और लंबे वक्त तक पानी के अंदर रह सके. पाकिस्तान अपनी पनडुब्बियों को अपग्रेड करने का भी काम कर रहा है. चीन-पाकिस्तान की परियोजना के तहत चीन में युआन क्लास की पनडुब्बियां भी बनाई जा रही हैं.

अगर पाकिस्तान को एआईपी सिस्टम मिल गया होता तो इसकी पनडुब्बियों की क्षमता बढ़ जाती और डीजल इंजन बिना वातावरण की हवा के एक सप्ताह या उससे ज्यादा वक्त के लिए चल सकते थे. लेकिन जर्मनी की चांसलर ने उनके अनुरोध को सीधे ठुकरा दिया.

पारंपरिक पनडुब्बियों को हर दूसरे दिन सतह पर आना पड़ता है ताकि उनके डीजल इंजन को हवा मिल सके लेकिन इससे पनडुब्बियों के नजर में आने का खतरा बढ़ जाता है.

एक भारतीय अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि जर्मनी के पाकिस्तान की सरकार को तकनीकी मदद करने से इनकार की वजह से उसकी पनडुब्बियों की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी. 

दूसरी तरफ, भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन स्वदेशी रूप से नेवी की पनडुब्बियों के लिए इस सिस्टम का विकास कर रहा है. पिछले साल डीआरडीओ ने जमीन आधारित प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया था. भारत ने ऐलान किया था कि इससे डीजल-इलेक्टिक पनडुब्बियां और घातक तरीके से वार करने में सक्षम हो जाएंगी.

मामले पर नजर बनाए हुए लोगों का कहना है कि जर्मनी ने पाकिस्तान के खिलाफ इसलिए सख्त रुख अपनाया है क्योंकि आतंकवाद को लेकर उसकी भूमिका हमेशा से संदिग्ध रही है. मई 2017 में काबुल में जर्मनी दूतावास के नजदीक हुए ट्रक बम हमले के दोषियों की पहचान करने में भी पाकिस्तान सरकार नाकाम रही थी.

इस हमले में करीब 150 लोगों की मौत हुई थी. इस आतंकी हमले के पीछे हक्कानी नेटवर्क का हाथ बताया गया जिसे पाकिस्तान संरक्षण देता रहा है. अफगान नेशन डायरेक्टोरेट ऑफ सिक्योरिटी ने आधिकारिक तौर पर इस आतंकी हमले के लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान में स्थित हक्कानी नेटवर्क को दोषी ठहराया था और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर हमले की योजना बनाने में सहयोग करने का आरोप लगाया था. जर्मन के अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान ने इस आतंकी हमले की जांच को गंभीरता से नहीं लिया.

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