जर्नलिस्ट का दावा-करोड़ों को खत्म करने के लिए न्यूक्लियर हमले की फिराक में ISIS

2014122417412165580_मोसुल (इराक): आईएसआईएस के साथ 10 दिन बिताकर लौटे जर्मन जर्नलिस्ट जर्गन टोडेनहॉफर ने दावा किया है कि आतंकी धरती से करोड़ों लोगों का एक साथ नामोनिशान मिटाने के लिए न्यूक्लियर हमले की तैयारी कर रहे हैं। 75 साल के जर्नलिस्ट ने आतंकियों के साथ बिताए वक्त के बारे में अपनी नई किताब में जानकारी दी है। उन्होंने पूरे विश्वास से कहा है कि आतंकी पश्चिमी देशों के हर शख्स को खत्म कर देना चाहते हैं और पूरी दुनिया पर इस्लामिक शासन कायम करना चाहते हैं।
 
जर्गन को आईएसआईएस ने अपने ठिकानों पर वक्त बिताने की मंजूरी इसलिए दी, क्योंकि वे काफी वक्त से अमेरिका की मिडल ईस्ट पॉलिसी की आलोचना करते रहे हैं। उनकी किताब का नाम है ‘Inside IS – Ten Days In The Islamic State.’ जर्नलिस्ट के मुताबिक, आतंकी खास तौर पर पश्चिमी देशों के खिलाफ ‘न्यूक्लियर सूनामी’ लाना चाहते हैं। इसके अलावा, हर वो मुल्क आईएसआईएस के निशाने पर है, जो इस्लामिक स्टेट का विरोध कर रहा है।
क्या बताया जर्नलिस्ट ने
>जर्नलिस्ट ने किताब में लिखा है कि वे कई महीने तक आतंकी संगठन से स्काइप पर संपर्क पर रहे, जिसके बाद उन्हें आईएसआईएस के इलाके में जाने की मंजूरी मिली।
 
>आईएसआईएस के प्रभाव वाले क्षेत्र में पहुंचने के बाद उनके और उनके बेटे के मोबाइल फोन जमा करा लिए गए। जर्नलिस्ट ने एक अखबार से बातचीत में बताया, ”वहां लोग बैरकों, गुफाओं और बम से तबाह घरों में रहते हैं। मैं फर्श पर सोता था। मैं खुशकिस्मत था कि मेरे सोने के लिए प्लास्टिक की चटाई दी गई थी। मेरे पास मेरा सूटकेस, बैकपैक और स्लीपिंग बैग था।”
 
>जर्नलिस्ट के मुताबिक, आईएसआईएस सिर कलम करने वाले वीडियो जारी करके आबादी वाले इलाकों में अपना डर फैलाना चाहता है। इस डर की वजह से उन्हें आसपास के इलाकों पर कब्जा करने में आसानी हो जाती है।
 
>जर्नलिस्ट ने कहा कि उन्होंने आज तक जिन आतंकी संगठनों को जाना है, उनमें आईएसआईएस सबसे बुरा है। उन्हें रोकने की क्षमता हर किसी में नहीं। सिर्फ अरब के लोग ही उन्हें रोक सकते हैं। इस संगठन के खतरों को पश्चिमी मुल्क अंडरएस्टिमेट कर रहे हैं।
 
>आतंकियों को इस बात का भरोसा है कि वे यह जंग जीतकर रहेंगे। वे 50 करोड़ लोगों का खात्मा करके रहेंगे। आतंकी यह सब कुछ धार्मिक साफ-सफाई के नाम पर अंजाम देना चाहते हैं।
>आईएसआईएस के फाइटर्स पश्चिमी मुल्कों की कल्पना के उलट बहुत ज्यादा खतरनाक और स्मार्ट हैं। जीत को लेकर आतंकियों को इतना कॉन्फिडेंट दुनिया के किसी वॉर जोन में नहीं देखा।
 
>आतंकी इस्लाम में भरोसा नहीं करने वाले हर किसी को खत्म कर देना चाहते हैं। वह सभी महिलाओं और बच्चों को गुलाम बना लेना चाहते हैं। सभी शियाओं, यजीदी, हिंदुओं और नास्तिकों को खत्म कर देना चाहते हैं।
>आईएसआईएस का यह भी मानना है कि डेमोक्रेसी की हिमायत करने वाले मुस्लिमों को भी मार डालना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसे मुसलमान खुदा के नियमों के आगे इंसान के नियमों को तरजीह दे रहे हैं।
आईएसआईएस : आतंक का एक साल, 6500 बेकसूरों की मौत
 
आईएसआईएस चीफ अबु बक्र अल बगदादी ने एक साल पहले यानी 29 जून 2014 को खुद को नया खलीफा घोषित किया था। पिछले साल जून में हीआईएसआईएस इराकी शहर मोसुल पर कब्जा कर सुर्खियों में आया था। तब से अब तक यह आतंकी समूह 6500 से ज्यादा लोगों की हत्या कर चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल स्टीव वाॅरेन के मुताबिक, आईएसआईएस ने एक साल में अपना 25 फीसदी इलाका अमेरिकी, सीरियाई और इराकी सुरक्षा बलों से लड़ाई में खो दिया। लेकिन उसने अपनी दहशत कई गुना बढ़ा दी है। आईएसआईएस ने तुर्की से लेकर इराक के कोबानी तक 400 किलोमीटर लंबी ऐसी बॉर्डर बना ली है, जिसे तोड़ पाना मुश्किल है।
 
आईएस हर दिन कमा रहा 10 लाख डॉलर, उसके खिलाफ लड़ाई पर 3 देश हर दिन लगा रहे 91 लाख डॉलर
 
– आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में अब अमेरिका, इराक और सीरिया के सुरक्षा बलों को हर दिन 91 लाख डॉलर का खर्च आ रहा है। अमेरिका को अब तक इस ऑपरेशन की कुल लागत 3 अरब डॉलर आ चुकी है।
 
– आईएसआईएस ने 2014 में अवैध वसूली कर, तेल के कुएं हथिया कर और बैंक लूटकर 1.5 अरब डॉलर कमाए। इसमें से 60 करोड़ डॉलर सिर्फ अवैध वसूली कर बटोरे।
पिछले साल सितंबर में आईएसआईएस हर दिन 30 लाख डॉलर कमा रहा था। अब वह सिर्फ 10 लाख डॉलर प्रतिदिन कमा रहा है।
 
– आईएचएस जेन्स टेररिज्म एंड इन्सर्जेंसी सेंटर के मुताबिक, आईएसआईएस ने सालभर में इराक-सीरिया में 3095 हमले किए हैं। इनमें 6546 आम नागरिकों की मौत हुई है। मई 2015 में ही आईएसआईएस ने 90 हमले किए। आईएस के 10 हजार आतंकी पिछले एक साल में मारे जा चुके हैं। लेकिन अभी भी इसके लड़ाकों की संख्या 50 हजार के आसपास है।
 
कहां-कहां मौजूद है आईएसआईएस?
 
यह आतंकी संगठन इराक और सीरिया में सबसे ज्यादा सक्रिय है। इसके अलावा यह तुर्की, लीबिया और इजिप्ट में भी अपनी जड़ें फैला रहा है। सऊदी अरब में भी इसने अपने कई आतंकी भर्ती कर रखे हैं। मंगलवार को ही इस आतंकी समूह ने तालिबान लड़ाकों को ननगरहर प्रांत से खदेड़ दिया।
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