जयपुर: क्लर्क ने डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर कर बना दिए फर्जी हथियार लाइसेंस

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जयपुर। नागालैंड और जम्मू-कश्मीर से बने फर्जी हथियार लाइसेंस मामला फिर गरमा गया है । केन्द्र सरकार ने नागालैंड से बने 500 फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में राजस्थान सरकार से रिपोर्ट मांगी है । केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान के 500 लोगों के नागालैंड से फर्जी हथियार लाइसेंस बनवाने को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगने के साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है ।

इधर जम्मू-कश्मीर से बने करीब 5,000 हजार फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में राजस्थान एटीएस ने जांच पूरी कर गृह विभाग को रिपोर्ट सौंप दी है। राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करने पर विचार कर रही है । दरअसल करीब तीन माह पूर्व राजस्थान पुलिस ने नगालैंड से फर्जी हथियारों के लाइसेंस जारी होने के मामले का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया था । गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में सामने आया कि पिछले दो साल में उन्होंने नागालैंड के विभिन्न स्थानों से हथियारों के 500 लाइसेंस बनवाए । फर्जी लाइसेंस बनवाने वाले गिरोह का मुख्य सरगना मूलरूप से चूरू जिले का रहने वाला भंवर लाल ओझा है । वह पिछले 40 साल से नगालैंड में व्यापार कर रहा है। नागालैंड के दीमापुर

,जुन्हेबोटो एवं कोहिमा जिला कलेक्ट्रेट में आने-जाने के दौरान ओझा की वहां के कर्मचारियों संजय पांडे, गोखिय, मोहम्मद सिराज व उत्तम से उसकी दोस्ती हो गई। ओझा ने उन्हें 60 से 70 हजार रुपये देकर हथियारों का फर्जी लाइसेंस बनवाने का काम शुरू किया। उदयपुर पुलिस अधीक्षक राजेंद्र गोयल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि नगालैंड के जुन्हेबोटो कलेक्ट्रेट के एक क्लर्क ने डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर कर लोगों के फर्जी हथियार लाइसेंस बनवा दिए । जिन लोगों के लाइसेंस बने, उन्हें नगालैंड के विभिन्न स्थानों का स्थाई और अस्थाई निवासी बताया गया। फर्जी पतों पर दस्तावेज तैयार करवाए गए ।
ओझा लोगों से तीन से चार लाख रुपये लेकर फर्जी लाइसेंस बनवाता था। इसमें से वह सरकारी कर्मचारियों को 60 से 70 हजार रुपये देता था । जिन 500 लोगों के लाइसेंस बनवाए गए वे सभी राजस्थान के उदयपुर, सीकर, बीकानेर, झुंझुनूं और जयपुर जिलों के रहने वाले हैं। पुलिस ने इन लोगों को भी नामजद किया है । इधर जम्मू-कश्मीर के 6 जिलों में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों की सहमति पर पिछले एक दशक में राजस्थान के 5,000 लोगों के नाम से फर्जी हथियार लाइसेंस जारी होने की जांच राज्य एटीएस ने पूरी कर गृह विभाग को सौंप दी है ।

अब राज्य सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने पर विचार कर रही है । एटीएस की जांच में सामने आया कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी,पूंछ,उधमपुर,श्रीनगर और किस्तवार आदि जिलों से राजस्थान के लोगों के नाम से हथियार लाइसेंस जारी हुए हैं । इनमें से कुछ को तो जम्मू-कश्मीर के विभिन्न स्थानों का मूल निवासी बता कर लाइसेंस बनवाए गए । वहीं कुछ लाइसेस जम्मू-कश्मीर में पदस्थापित राजस्थान के मूल निवासी बीएसएफ,सीआरपीएफ सहित अन्य केन्द्रीय सेवाओं के कर्मचारियों के नाम से जारी हुए,इनमें से अधिकांश को इस बात की जानकारी नहीं है । एटीएस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अजमेर निवासी मोहम्मद जुबेर को गिरफ्तार किया तो सामने आया कि उसने 2 से 4 लाख रूपए लेकर फर्जी लाइसेंस बनवाए थे ।

राजस्थान एटीएस के अतिरिक्त महानिदेशक उमेश मिश्रा ने बताया कि हमने जांच पूरी कर ली । मामला गंभीर है,जम्मू-कश्मीर से हथियार जारी करने के मामले में अनियमितता हुई है । एटीएस जांच में सामने आया कि कई अपराधियों और व्यापारियों के नाम से लाइसेंस जारी कर दिए गए ।

बीकानेर पुलिस अधीक्षक बोले,कई लाइसेंस निलंबित किए

बीकानेर पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह गोदारा का कहना है कि नागालैंड में जिन लोगों के नाम से फर्जी हथियार लाइसेंस बनवाए गए थे । उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज है । अब तक 21 लाइसेंस बीकानेर जिले में निरस्त कराए जा चुके है,शेष की कार्रवाई जारी है । कुछ गिरफ्तारियां हुई है और शेष गिरफ्तारिंया अगले कुछ दिन में होगी ।

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