जम्मू में झमाझम बारिश के साथ मानसून की दस्तक, तापमान में जबरदस्त गिरावट

- in कश्मीर

जम्मू में झमाझम बारिश के साथ मानसून ने दस्तक दे दी है। राज्य के अलग-अलग इलाकों में वीरवार को तेज और हल्की बारिश से मौसम सुहावना हो गया। अमरनाथ की पवित्र गुफा सहित घाटी के कई ऊपरी इलाकों में बर्फबारी भी हुई। 

राज्य के अधिकतर हिस्सों में दिन के साथ रात के तापमान में जबरदस्त गिरावट आई है। मौसम के बदले मिजाज से अमरनाथ यात्रियों को राहत मिली है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, तय समय पर पहुंचे मानसून से अच्छी बरसात होने की उम्मीद है। 

मौसम विभाग श्रीनगर के निदेशक सोनम लोट्स ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में मानसून घोषित किया गया है। आगामी 3 जुलाई तक जम्मू और कश्मीर में मौसम का ऐसा ही मिजाज रहेगा। रियासत में अमूमन जून के आखिरी और जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून पहुंचता रहा है। 

मानसून जम्मू-कश्मीर से पहले देश के विभिन्न हिस्सों से होकर यहां पहुंचता है। मौसम विशेषज्ञ यशपाल शर्मा के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून में तेजी आने के आसार हैं। राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। 

मानसून की अवधि जून से सितंबर तक ली जाती है। वर्ष 2016 में जम्मू संभाग में जून में 145.1 मिलीमीटर, जुलाई में 530.7, अगस्त में 472.8 और सितंबर में 28.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वर्ष 2017 के जून माह में 187.1, जुलाई में 322.8, अगस्त में 324.0 और सितंबर में 35.9 मिलीमीटर बारिश हुई था। 

आज कई इलाकों में बारिश 
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को जम्मू संभाग के अधिकतर हिस्सों और कश्मीर संभाग के कुछ हिस्सों में बारिश होगी। 30 जून को भी जम्मू और कश्मीर में बारिश के आसार हैं। मौसम के बदले मिजाज का असर लद्दाख क्षेत्र में भी दिखेगा। 

कब कब राज्य में पहुंचा मानसून
2014 – 1 जुलाई
2015 – 24 जून
2016 – 21 जून
2017 – 3 जुलाई
2018 – 28 जून 

केरल से चलकर राज्य में पहुंचता है मानसून 
रियासत में मानसून की साउथ वेस्ट विंड (हवाएं) वे आफ बंगाल और अरेबियन समुंद्र से आती हैं। देश में केरल से दाखिल होकर धीरे-धीरे यहां तक पहुंचती हैं। यहां से ये हवाएं आगे पाकिस्तान के साथ लगते इलाकों से होती हुई हिमालय में जाकर रुक जाती हैं। राज्य में मानसून करीब 30 जून से  15 सितंबर तक सक्रिय रहता है।

मानसून की हवाएं अपने साथ नमी लेकर चलती हैं। इसी तरह 15 सितंबर से केसपियन सी (ईरान-इराक के पास), मेडिटेरियन सी और ब्लैक सी से वेस्टर्न डिस्टरवेंस की हवाएं चलती हैं जो जेएंडके में वेस्टर्न डिस्टरवेंस का काम करने के साथ मानसून की हवाओं से टकरा कर उन्हें वापस भेजती हैं।

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