UP चुनाव: इस कारण से हार सकते है अखिलेश

उत्तर प्रदेश चुनाव जैसे-जैसे गहराता जा रहा है वैसे-वैसे मूड और मुद्दों के भी रंग बदल रहे हैं। कानून-व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही BJP और BSP को चुनाव के बाद हुई घटनाओं ने और आक्रामक होने का मौका दिया है। खास बात यह है कि बिजनौर से सुलतानपुर तक हो रही घटनाओं का असर स्थानीय राजनीति में दिखने लगा है।

UP चुनाव: इस कारण से हार सकते है अखिलेश

4 जनवरी को चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा के बाद राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में बलात्कार से लेकर हत्या तक की घटनाएं हुई हैं। चुनाव आयोग का दावा था कि उसके कमान संभालने के बाद हालात बदलेंगे। यह अलग बात है कि आयोग अब तक अपनी हनक नहीं दिखा सका है। असर यह है कि अब इन घटनाओं को सियासत की हांडी में पकाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

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व्यापारी वोट वाया श्रवण साहू केस
लखनऊ में श्रवण हत्याकांड हो या मेरठ में व्यापारी की हत्या का मसला, BJP ने इसे मुद्दा बनाने के लिए पूरा दम लगा दिया है। श्रवण साहू हत्याकांड पर जनता की निगाहें इसलिए भी हैं कि इसमें लखनऊ पुलिस की भूमिका पर सीधे सवाल उठे हैं। धमकी मिलने के बाद हत्या होने से कानून-व्यवस्था संदेह के घेरे में है। दूसरी ओर, नोटबंदी से नाराज व्यापारियों को ‘वापस’ लाने के लिए BJP ने इसे सुरक्षा के सवाल से जोड़ दिया है। मेरठ में अमित शाह ने अपने पैदल मार्च को भी इस मुद्दे से जोड़ा था। सुरक्षा का सवाल आम आदमी से सीधे जुड़ा है, इसलिए यह लोगों पर असर भी करता है। इस मुद्दे का फायदा BSP को भी मिलने के आसार हैं।

जाट ‘स्वाभिमान’ वाया बिजनौर मर्डर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की नाराजगी की खबरों के बीच बिजनौर में हुए जाट युवक की हत्या ने भी समीकरण बदले हैं। पहले चरण की वोटिंग के एक दिन पहले बिजनौर के पेदा क्षेत्र में एक युवक विशाल की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। उसे बचाने में पिता भी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना को सांप्रदायिक रंग इसलिए मिल गया कि दो अलग-अलग समुदायों के लोग इसमें शामिल थे। साथ ही, पिछले साल 16 सितंबर को पेदा में ही लड़की से छेड़छाड़ के बाद फैले सांप्रदायिक तनाव से भी इस घटना को जोड़ा जा रहा है।
 इस मामले में BJP नेता ऐश्वर्य मौसम चौधरी जेल में हैं। BJP ने बिजनौर सदर सीट से उनकी पत्नी शुचि चौधरी को टिकट भी दिया है। यहां दूसरे चरण का चुनाव बुधवार को है। इस मुद्दे को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए खूब हवा दी जा रही है। दूसरे चरण में कई सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इसलिए विपरीत ध्रुवीकर में यह मुद्दा अहम हो सकता है। BSP सुप्रीमो मायावती ने यहां आयोजित रैली में मंच से विशाल हत्याकांड का जिक्र किया, वहीं कैबिनेट मंत्री आजम खान हिंदू-मुस्लिम एकता की दुहाई देते हुए इसकी CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

अखिलेश के ‘आगाज’ पर सवाल!

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खराब कानून-व्यवस्था को लेकर सबसे अधिक निशाने पर रही अखिलेश सरकार के लिए सुल्तानपुर कांड ने असहज स्थिति पैदा कर दी है। सुलतानपुर के समाजवादी पार्टी विधायक अरुण वर्मा पर एक युवती ने बलात्कार का आरोप लगाया था। शनिवार देर रात युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। युवती का परिवार सीधे-सीधे विधायक पर हत्या का आरोप लगा रहा है।

उनका आरोप है कि 21 फरवरी को विधायक के खिलाफ इस मामले से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई थी, लेकिन इससे पहले हत्या कर दी गई। यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ता जा रहा है कि अरुण वर्मा अखिलेश के करीबी विधायकों में गिने जाते हैं। मिशन 2017 के लिए रैली का आगाज भी अखिलेश ने अरुण वर्मा की सदर सीट से किया था। BJP-BSP इस मामले को उछालकर अखिलेश के ‘काम बोलता है’ नारे को ‘अपराध बोलता है’ में बदलने को जुट गई है। इसका असर जिले की दूसरी सीटों पर भी पड़ सकता है।
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