चाइल्ड पीजीआई में खुदकुशी मामलाः आत्महत्या के लिए तीसरे प्रयास में जुटा पाई थी हिम्मत

- in दिल्ली

15 वर्ष की उम्र में एक दसवीं की छात्रा ने मानसिक रूप से परेशान होकर जिला अस्पताल की सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। छात्रा आत्महत्या करने से पहले दो बार जिला अस्पताल पहुंची और सातवीं मंजिल पर गई। इसका खुलासा जिला अस्पताल में कुछ लोगों से बात करने पर हुआ है।चाइल्ड पीजीआई में खुदकुशी मामलाः आत्महत्या के लिए तीसरे प्रयास में जुटा पाई थी हिम्मत

सूत्रों से पता चला है कि छात्रा अलीशा आत्महत्या जैसा कदम उठाने से पहले दो बार जिला अस्पताल गई थी। दोनों बार अलीशा लिफ्ट के जरिए सातवीं मंजिल पर पहुंची। लेकिन हिम्मत पस्त होने पर दोनों बार ही वापस नीचे उतर आई। कुछ अस्पताल स्टाफ का कहना है कि छात्रा को अस्पताल परिसर में भी टहलते हुए भी देखा गया था, लेकिन वह समझे की लड़की दवाई लेने आई होगी। उन्हें क्या मालूम था कि वह आत्महत्या करने के लिए जगह तलाश कर रही है।

पड़ोसी जता रहे प्रेम प्रसंग में आत्महत्या करने की आशंका
परिजनों की मुताबिक अलीशा इस साल ही 10वीं कक्षा में आई थी। सब कुछ सही चल रहा था। वह पढ़ने में काफी होशियार थी। परिजनों को अभी तक विश्वास नहीं है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसके चलते उनकी बेटी ने आत्महत्या करने का कदम उठा लिया। कुछ पड़ोसी दबी जुबान से मामले को प्रेम प्रसंग बता रहे हैं। छात्रा का एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। कुछ दिनों से दोनों के बीच खटपट चल रही थी। पड़ोसियों ने प्रेम प्रसंग में छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने की आशंका जताई है।

घटना के बाद नहीं खुली अस्पताल प्रबंधन की नींद
जिला अस्पताल की सातवीं मंजिल का गेट अब भी खुला हुआ है। गेट की कुंडी टूटी हुई है। घटना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने दरवाजे की मरम्मत नहीं करवाई है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने गार्डों को होने के बावजूद आखिर छात्रा सातवीं मंजिल पर कैसे पहुंच गई। इस पर सीएमएस डॉ. अजेय अग्रवाल का कहना है कि जल्द ही दरवाजे की मरम्मत करवाकर उसे लॉक करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोजाना सैकड़ों मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। ये कैसे पता लगाया जाए कि कौन कहां जाएगा। फिर भी घटना के बाद गार्डों को चौकन्ना रहने को कहा गया। गार्डों को निर्देश दिए गए हैं कि वह किसी को भी सातवीं मंजिल न जाने दें।

ये है पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक मूलरूप से बिजनौर निवासी अलीशा (15) पुत्री महबूब परिवार के साथ सेक्टर-31 निठारी में रहती थी। वह सर्वहितकारी शिक्षा सदन सेक्टर-31 में हाईस्कूल की छात्रा थी। सोमवार सुबह करीब 11 बजकर 25 मिनट पर वह अस्पताल की सातवीं मंजिल पर पहुंची और दीवार पर खड़ी हो गई। इस दौरान नीचे खड़े कुछ लोगों ने उसके इरादे भांपकर पीछे हट जाने को कहा। लेकिन उसने किसी की बात सुने बिना सीधे छलांग लगा दी। बिल्डिंग के गार्ड सतपाल सिंह ने बताया कि जैसे ही उन्होंने नीचे से किशोरी को छत पर देखा तो उसे रोकने के लिए चिल्लाने के साथ ही हाथों से भी इशारा किया। लेकिन किशोरी झट से नीचे कूद गई।

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