चलते-चलते बढ़ जाएगी आपकी उम्र…

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चहलकदमी की रफ्तार बढ़ा कर आप अपने जीवन के कुछ सालों को और बढ़ा सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्दी मौत के खतरे को तेज गति से चलने से बहुत हद तक कम किया जा सकता है. हल्की चहलकदमी की तुलना में औसत गति की चाल किसी भी कारण से होने वाली मौत में 20 प्रतिशत तक कमी करती है जबकि तेज गति से चलने से इस खतरे को 24 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. एक नए अध्ययन के मुताबिक, चाल की गति के प्रभाव को बुजुर्गों में ज्यादा स्पस्ट तौर पर देखा गया.चलते-चलते बढ़ जाएगी आपकी उम्र...

औसत गति से चलने वाले 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों में दिल संबंधी बीमारियों से होने वाली मौत के जोखिम में 46 प्रतिशत कमी दर्ज की गई वहीं तेज चलने वालों में यह कमी 53 प्रतिशत रही. ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एमैनुएल स्टैमाटाकिस ने कहा , “ आम तौर पर तेज गति यानि प्रति घंटे पांच से सात किलोमीटर चलना चाहिए.

हालांकि यह चलने वाली की सेहत के स्तर पर भी निर्भर करता है.  इसका एक वैकल्पिक सूचक यह है कि ऐसी गति से चलें जिससे रुकने पर आपकी सांस फूले या आपको पसीना आए. ” यह अध्ययन ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है.  

दिनचर्या में 20 मिनट के बदलाव से बच सकती है आपकी जिंदगी
अगर आप लगातार काफी समय तक बैठे रहते हैं और किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी से भागते रहते हैं तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. लगातार बैठे रहना, आराम करना, बैठे-बैठे टीवी देखना या कम्प्यूटर पर लगातार काम करते रहना आपको जोखिम में डाल सकता है, और इस आराम की भरपाई करना काफी महंगा साबित हो सकता है. ब्रिटिश मेडिकल जरनल के अनुसार, हर किसी को एक सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्र शारीरिक कार्य जरूर करने चाहिए. लेकिन फिर भी एक तिहाई से अधिक जनता इससे काफी दूर हैं. तो अगर आप भी नियमित व्यायाम नहीं कर पाते और अपने आप को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो अपने रूटीन में 20 मिनट का ये बदलाव जरूर करें.

3 मिनट की बेड स्ट्रेचिंग
सुबह सो कर उठने के बाद कम से कम 3 मिनट बेड स्ट्रेचिंग करें. इससे शरीर में लचीलापन बना रहता है और आपकी मसल्स को आराम मिलता है. सोकर उठने के बाद की गई स्ट्रेचिंग से joints को भी आराम मिलता है. इससे शरीर की अकड़न भी खत्म होती है जिससे आपकी बॉडी का posture भी सही होता है.

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