गुजरात के मंत्री भूपेन्द्र चूड़ासमा को ‘सुप्रीम’ राहत, निर्वाचन रद्द करने के फैसले पर लगी रोक

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कदाचार और हेराफेरी के आधार पर गुजरात के शिक्षा एवं कानून मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासमा का निर्वाचन रद्द किये जाने के उच्च न्यायालय के फैसले पर शुक्रवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति एम. एम. शांतनगौदर और न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और नीरज किशन कौल तथा श्री चूड़ासमा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस उम्मीदवार आश्विन राठौड़ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलें सुनने के बाद गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। न्यायालय ने राठौड़ को नोटिस भी जारी किया।
सुनवाई की शुरुआत में कौल ने कहा कि उनके मुवक्किल का निर्वाचन कदाचार और हेराफेरी के आधार पर रद्द कर दिया गया है, क्योंकि 429 पोस्टल बैलेट की गिनती नहीं हुई थी और यह संख्या जीत के आंकड़े से अधिक थी। उसके बाद साल्वे ने जिरह शुरू की और कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा कदाचार किये जाने की बात अनुमान के तौर पर कही जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार की चुनाव याचिका केवल अनुमानों के आधार पर दायर की गयी थी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति थी तो न्यायाधीश को उन 429 वोटों को मंगवाकर यह निर्णय करना चाहिए था कि ये वोट नियमों के तहत खारिज हुए थे या नहीं। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि जीत का आंकड़ा इन पोस्टल मतों की संख्या से कम था, लेकिन यह जज को निर्धारित करना चाहिए था कि क्या चुनाव परिणाम इन वोटों के कारण प्रभावित हुए थे या नहीं?
सिब्बल ने न्यायालय को उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक न लगाने का न्यायालय से अनुरोध किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस प्रकार के मामलों में अनगिनत मौकों पर अंतरिम रोक लगा चुकी है। इतना कहकर न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगा दी और प्रतिवादी कांग्रेस उम्मीदवार को नोटिस जारी किया। उच्च न्यायालय ने कांग्रेस उम्मीदवार आश्विन राठौड़ की याचिका पर गत मंगलवार को चूड़ासमा का निर्वाचन रद्द किया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें 2017 के चुनाव में कदाचार और हेरफेर करने का दोषी करार दिया है।
कांग्रेस उम्मीदवार ने धोलका विधानसभा सीट पर भाजपा नेता भूपेंद्र सिंह चूड़ासमा के निर्वाचन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। चूड़ासमा ने 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में 327 वोट के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी। चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि भूपेंद्र ने चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में, विशेष रूप से वोटों की गिनती के समय कदाचार किया और नियमों का उल्लंघन किया।

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