गांधी जयंती के दिन भी किसानों पर गोलियां चलवाकर मोदी ने साबित कर दिया, ये गोडसे के लोग हैं

2 अक्टूबर 2018 महात्मा गांधी की 150वीं जयंती। 2 अक्टूबर 2018 लाल बहादूर शास्त्री की 115वीं जयंती। 2 अक्टूबर 2018 मोदी सरकार द्वारा किसानों पर वारट कैनन और आंसू गैस के गोले चलवाना।
जी हां, आज मोदी सरकार ने किसान क्रांति यात्रा में शामिल निहत्थे किसानों के साथ जमकर हिंसा की है।
अपनी मांगों को पूरी करवाने के लिए हरिद्वार से चला हजारों किसानों का काफिला सोमवार को दिल्ली की सरहद पर पहुंचा। भारतीय किसान यूनियन की अगुवाई इस किसान रैली को मोदी सरकार ने दिल्ली बार्डर पर ही रोक दिया। मंगलवार को जब किसानों ने दिल्ली में घुसने की कोशिश की तब पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले चलाए।
देश के अन्नदाता को सड़क पर लहूलुहान किया गया। अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले गांधी की 150वीं जयंती पर किसानों के साथ हुई बर्बरता को क्या समझा जाए?
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किसानों के प्रदर्शन में ज्यादातर बूढ़े और अधेड़ उम्र की महिलाएं और पुरुष होते हैं। वे कोई हुड़दंगी भीड़ नहीं होते। फिर उनके साथ हिंसा क्यों की गई? क्या दिल्ली की सत्ता को निहत्थे बुजुर्गों से खतरा है?
हो भी सकता है। क्योंकि भारत में वो दक्षिणपंथी शक्तियां भी हैं जिन्हें गांधी जैसे निहत्थे बुजुर्ग से खतरा था। नाथूराम गोडसे जिसने गांधी की हत्या की उसका संबंध RSS से रहा। देश के में जो सरकार है उसके नेताओं के संबंध भी RSS से हैं।
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तो क्या गांधी जयंती पर किसानों पर गोलियां चलवाकर मोदी ने साबित कर दिया, देश में गोडसेवाद का उदय हो चुका है?
दरअसल ये बातें किसी और ने नहीं मेहनतकश किसानों ने बोली है।
सुबह से चल रहे संघर्ष के दौरान किसानों की आवाज़ बने बोलता हिन्दुस्तान से बात करते हुए अधेड़ उम्र किसान बोल पड़े- ‘आज गांधी जयंती पर हमपर लाठियां बरसाई गई हैं, ये गांधी नहीं गोडसे को मानने वाले लोग हैं।
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