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क्या आप जानते हैं राहु गृह की उत्पत्ति कैसे हुई?

हिन्दू धर्म में राहु को एक पाप गृह माना जाता है. यदि राहु किसी की कुंडली में अशुभ प्रभाव देता है, तो उस व्यक्ति का जीवन अस्त-व्यस्त कर देता है. इसी कारण से व्यक्ति राहु के प्रभाव को शांत करने के लिए कोई भी उपाय करने को तैयार रहते हैं. आज बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्हें राहु के विषय में अधिक जानकारी नहीं है, जैसे राहु कौन है? उसे गृह की उपाधि किसने दी आदि बातें व्यक्ति के मन में उत्सुकता उत्पन्न करती हैं. आपकी इसी उत्सुकता को शांत करने के लिए आइये जानते हैं राहु से सम्बंधित रोचक जानकारियां.क्या आप जानते हैं राहु गृह की उत्पत्ति कैसे हुई?राहू कौन है – शास्त्रों के अनुसार राहु एक दानव है, जिसका जन्म हिरन्यकश्यप की पुत्री सिंहिका के गर्भ से हुआ था. राहु के पिता विप्रचिती नामक दैत्य था जिसने सभी दानवी गुणों को त्याग दिया था और सात्विक जीवन व्यतीत कर रहा था.

राहु को ग्रह की उपाधि – समुद्र मंथन से अमृत की उत्पत्ति हुई, जिसे भगवान विष्णु देवताओं में वितरित कर रहे थे. उसी समय राहु ने देवता का रूप धारण कर छल से अमृत का पान कर लिया, जिससे उसे अमरत्व की प्राप्ति हुई. अमृत पीने के पश्चात राहु को देवता की उपाधि प्राप्त हुई, जिससे वह देवसभा में सम्मलित हो गया वहीँ राहु को गृह की उपाधि प्राप्त हुई.

राहु का प्रभाव – जब राहु किसी जल राशि कर्क, वृश्चिक, मीन में होता है और ब्रहस्पति उस पर दृष्टि रखते हैं, तो यह अधिक प्रभावशाली हो जाता है, जिससे व्यक्ति में पूर्वाभास की उत्पत्ति होती है. लेकिन जब राहु किसी व्यक्ति की कुंडली में अशुभ फल प्रदान करता है, तो उस व्यक्तियों का जीवन संकटों से भर जाता है.

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