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क्या आप जानते हैं मृत्यु के बाद आत्मा कहां किस लोक में जाती हैं?

मृत्यु को लेकर कुछ ऐसे सवाल हैं, जो कभी ना कभी हमारे मन में उभर ही आते हैं। हम भले ही इन सब बातों पर विश्वास ना करें लेकिन जब इस तरह की बातें होती हैं तो हमारी जिज्ञासा बढ़ जाती है। भृगु शास्त्र के अनुसार व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार वर्तमान जीवन के बाद किस लोक में स्थान प्राप्त होगा, यह उसकी कुण्डली से जाना जा सकता है। जी हां, आप कुंडली में देखकर जान सकते हैं कि मृत्यु के बाद आत्मा किस लोक में जाएगी…क्या आप जानते हैं मृत्यु के बाद आत्मा कहां किस लोक में जाती हैं?

ऐसे व्यक्ति होतें हैं दयावन

जिन व्यक्तियों की कुंडली में चन्द्रमा शुभ स्थिति में 12 घर में होता है वह दयावान होते हैं। ऐसे लोगों को अच्छे मित्र प्राप्त होते हैं और मृत्यु के बाद इन्हें स्वर्ग में स्थान मिलता है। ऐसा भृगु शास्त्र के अध्याय 2 में कहा गया है।

इनको मिलता है स्वर्ग में स्थान

भृगु शास्त्र के अध्याय 7 में कहा गया है कि अगर व्यक्ति की कुंडली के बारहवें घर में शुक्र शुभ स्थिति में होने पर व्यक्ति सुख-भोग प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति विलासी होते हैं। इन्हें धरती पर भरपूर यौन सुख प्राप्त होता है और मृत्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। ऐसा शुभ योग पूर्वजन्म के शुभ कर्मों से ही प्राप्त होता है।

इनको होती है हमेशा चिंता

जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु या केतु बारहवें घर में होता है, उनको चिंता के कारण सिरदर्द की बिमारी हो सकती है। ऐसे लोगों के बच्चे आखों की परेशानी से पीड़ित होते हैं, जीवन में इन्हें सुख कम मिल पाता है। मृत्यु के बाद भी इन्हें सद्गति प्राप्त नहीं होती है। अगर जीते जी कुछ पुण्य कर्म अर्जित नहीं कर पाए तो मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलना मुश्किल होता है।

मृत्यु के बाद स्वर्ग

भृगु शास्त्र के अनुसार जिन लोगों का जन्म धनु, मकर, कुंभ या मीन लग्न में होता है उन्हें मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलना सरल होता है। ऐसे व्यक्ति सद्कर्मों से स्वर्ग में स्थान पाते हैं।

ऐसे व्यक्तियों को स्वर्ग में स्थान मिलना कठिन

वृहद् पराशर होराशास्त्र के अनुसार, जिनकी कुण्डली में पाप ग्रह यानी सूर्य, मंगल, शनि, राहु बारहवें घर में हो अथवा बारहवें घर का स्वामी सूर्य के साथ हो उन्हें अपने आपको पाप कर्मों से रोकना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग जाने-अनजाने कुछ ऐसा काम कर लेते हैं जिनसे स्वर्ग के दरवाजे इनके लिए बंद हो जाते हैं।

मोक्ष प्राप्ति योग

जिन व्यक्तियों की कुंडली के लग्न में बृहस्पति, सप्तम भाव में शुक्र, चंद्रमा की राशि कन्या हो और धनु लग्न में मेष का नवांश हो तो ऐसी आत्मा को उच्चतर मोक्ष प्राप्त होता है। वह व्यक्ति जीवनभर धर्म-कर्म के कार्य करता है और ईश्वर के प्रवचनों को ध्यान में रखकर ही अपना जीवन यापन करता है।

इनको मिलता है यहां स्थान
शास्त्रों के अनुसार, लग्न में बैठा उच्च बृहस्पति अगर चंद्रमा को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो और अष्टम स्थान पर किसी भी ग्रह की मौजूदगी न हो तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में बहुत से धार्मिक कार्य करता है और ऐसी आत्मा प्रबल रूप में पुण्यात्मा होती है और मृत्यु के बाद स्वर्ग में स्थान प्रात होता है।

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