कोरोना काल-घरों का हाल : काम बढ़े, झगड़े बढ़े और साथ में बढ़ गई है उलझन

प्रीति सिंह
लॉकडाउन की वजह लोग घरों में बंद हैं। बंदी के अभी चार दिन हुए हैं लेकिन घरों में कोरोना वायरस के इतर कई समस्याएं आने लगी है। सबकी अपनी-अपनी समस्या है। बच्चे बाहर खेलने नहीं जा पा रहे हैं इसलिए परेशान हैं, पूरे दिन बाहर रहने वाले पुरुष घर में बंद हैं इसलिए परेशान हैं और घर की महिलाएं काम के बढ़े बोझ से परेशान हैं। कामवाली आ नहीं रही है, बच्चों और पति की फरमाइश बढ़ गई, जिसकी वजह से उन पर काम का बोझ बढ़ गया है। वहीं टीवी पर बच्चों और पति का कब्जा हो गया है, जिसकी वजह से वह अपना प्रोग्राम नहीं देख पा रही है। इस लॉकडाउन में महिलाएं और किन समस्याओं से दो-चार हो रही है आज हम उनसे जानेेंगे।
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने 24-25 की रात से पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया है। लोग घरों में बंद है। इस सबके बीच सबसे ज्यादा परेशान कोई है तो वह घर की महिलाएं। जहां पुरुष और बच्चों का समय नहीं बीत रहा वहीं महिलाओं को खुद के लिए समय नहीं मिल रहा। झाड़ू-पोछा, बर्तन, खाना बनाने से लेकर सबकी फरमाइश पूरी करने में वह हलकान हैं। इसका नतीजा है कि उनकी खीज बढ़ रही है और घर में लड़ाई का माहौल भी बन रहा है। ये महिलाए इस लॉकडाउन में कैसे अपना समय बिता रही है उन्हीं की जुबानी सुनते हैं। इन सब महिलाओं से हमने फोन पर बात की है।
गीता सिंह.
मुंबई के गोरेगांव में रहने वाली गीता सिंह गृहणी है। उनके पति फिल्म इंड्रस्ट्री में काम करते हैं। ये लोग लॉकडाउन होने से पहले से घर में बंद हैं। गीता कहती हैं-इस लॉकडाउन से कोरोना जाए या न जाए मैं जरूर बीमार पड़ जाऊंगी। पूरा दिन काम करते-करते दम निकल रहा है। बच्चे अलग से परेशान कर रहे हैं। आधा दिन तो पति और बच्चों पर चिल्लाते हुए बीत रहा है।
मंगला मणि.
वहीं लखनऊ के गोमती नगर विस्तार में रहने वाली मंगला मणि की अपनी समस्या हैं। कामवाली आ नहीं रही। उनका नौ दिन का उपवास है। पति और दोनों बच्चे घर पर हैं। अमूमन ये सभी लोग बाहर ही रहते हैं। अब सभी फुरसत में हैं। वह कहती हैं-हमारे यहां खाने को लेकर किचकिच बढ़ गई है। मेरा उपवास है और इन लोगों को नमक-मिर्च की पड़ी है। मेरा सारा रूटीन डिस्टर्व हो गया है। खुद के लिए एकदम टाइम नहीं मिल रहा है। बहुत खीज हो रही है। डर लगता है कि कहीं लड़ाई न हो जाए।
ममता उपाध्याय.
बैंगलोर की ममता उपाध्याय जो कि एक सोसाइटी में रहती है, कहती हैं-पति और बेटी दोनों घर पर हैं। सोसाइटी में रहते हैं। कॉरीडोर में भी नहीं जा सकते। बेटी दिन में बीस बार कहती है बाहर जाना है। घर में बोरियत हो रही है। पति का वर्क फ्रॉम होम हैं इसलिए उनसे मदद की उम्मीद करना बेमानी है। घर के काम से ज्यादा मुझे बेटी को घर में रोकना मेरे लिए चुनौती बनी हुई है। अभी तो पांच दिन हुए हैं, कैसे उसे इतने दिन घर में रोक के रख पाऊंगी, यही सोच-सोचकर मेरा सिरदर्द बढ़ रहा है।
प्रियंका मिश्रा.
 
 
वहीं लखनऊ की ही प्रियंका मिश्रा, जो पेशे से टीचर हैं, कहती हैं बस जल्दी सब ठीक हो जाए और कामवाली आ जाए। झाड़ू-पोछा और बर्तन करना बहुत भारी पड़ रहा है। मुझे छुट्टी जैसा कुछ नहीं लग रहा है। दिन भर एक ही काम है और वह है बनाना-खिलाना और बर्तन धुलना। टीवी पर पति और बच्चों का कब्जा है। सोचो कि थोड़ा टीवी देखकर मन ठीक कर लूं तो वह भी नहीं हो पा रहा है। आप समझ सकती हैं ऐसी स्थिति में क्या करने का मन करता है।

दिल्ली में रहने वाली दीपाली सिंह लॉकडाउन से ज्यादा किसी और वजह से परेशान हैं। इन्हें कामवाली के साथ-साथ पति के स्वास्थ्य की भी चिंता है। इनके पति एम्स दिल्ली में डॉक्टर हैं। वह हॉस्पिटल में ज्यादा समय बिता रहे हैं। दीपाली कहती हैं कि मेरा तो दिमाग परमानेंट कोरोना से हो रहे संक्रमण पर लगा हुआ है। एक ओर घर का काम तो दूसरी ओर पति के स्वास्थ्य के लेकर चिंता बनी हुई है। मेरी उलझन बढ़ती जा रही है। समझ नहीं आ रहा क्या करूं।
पूजा उपाध्याय.
वहीं बैंगलोर की ही पूजा उपाध्याय इस लॉकडाउन को लेकर कहती हैं-सारा रूटीन डिस्टर्व हो गया है। कामवाली आ नहीं रही है। घर का पूरा काम करना है। पति का वर्क फ्रॉम होम है। फादर इन लॉ भी साथ में रहते हैं। दिन भर चाय-नाश्ता खाना ही रह गया है। चूंकि हम सोसाइटी में रहते है। यहां रहने वाली हम सभी महिलाएं पहले खूब मस्ती करते थे। अब तो गलती से नीचे चले गए तो तुरंत पुलिस आ जाती है। बहुत कठिन समय चल रहा है।
नेहा अग्रवाल.
लखनऊ के ही गोमतीनगर में रहने वाली नेहा अग्रवाल की समस्या कुछ और है। उनके पति बैंक में काम करते हैं। उनका ऑफिस आना-जाना लगा हुआ है। नेहा अपने पति के बाहर जाने की वजह से डर में रहती है। वह कहती हैं-कामवाली के न आने से परेशान हूं लेकिन उससे ज्यादा मैं अपने पति के ऑफिस जाने की वजह से परेशान हूं। पति के आने के बाद से उनके सारे कपड़े धुलने से लेकर उनका मोबाइल फोन, बैग सब कुछ सिनेटाइज करना, ये सब बहुत हैक्टिक है।
अब गुजरात के जामनगर चलते हैं। यहां रहने वाली माधवी और राजूबेन परमार की सुनते हैं। माधवी परमार कहती है-हम लोग इस समय कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक ओर कोरोना को लेकर डरे हुए हैं तो दूसरी ओर सामान का किल्लत है। सभी लोग घर में है तो खाने-पीने की फरमाइश भी खूब हो रही है। मैं संयुक्त परिवार में रहती हूं इसलिए काम तो मिलजुलकर हो जा रहा है। हम सबसे ज्यादा राशन को लेकर परेशान हैं कि कही ये लॉकडाउन बढ़ गया तो क्या होगा ?
माधवी और राजूबेन परमार.
माधवी की सास राजूबेन परमार दूसरे शहर में रह रहे अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं। वह कहती हैं कि मेरा छोटा बेटा मुंबई में हैं ओर बेटी दूसरे देश में। हर वक्त दिमाग उन्हीं लोगों में लगा हुआ है। ईश्वर सब ठीक करें और मैं जल्दी अपने बच्चों से मिल पाऊं।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की उर्मिला त्रिपाठी इस लॉकडाउन से परेशान भी हैं और खुश भी। खुश इसलिए हैं क्योंकि परिवार के कई सदस्य होली में यहां आए थे जो लॉकडाउन की वजह से रूक गए हैं। बच्चों को अपने पास देखकर खुश हैं लेकिन वहीं दूसरे बेटे के परिवार के दूसरे शहर में रहने की वजह से परेशान हैं। वह कहती हैं-बस दुआ कीजिए ये कोरोना जल्दी खत्म हो और हमारी जिंदगी पहले जैसी हो जाए। जो जहां हैं वह स्वस्थ रहे।
यह तो कुछ महिलाओं की बात हैं। देश में अधिकांश गृहणियां इस लॉकडाउन की वजह से कई समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्हें राशन की भी फ्रिक हैं, उन्हें पति और बच्चों के स्वास्थ्य की भी फिक्र हैं। उन्हें दूसरे शहर रह रहे अपने परिजनों की भी फिक्र हैं, लेकिन साथ में उन्हें अपने कामवाली और टीवी ड्रामों की भी फिक्र हैं।

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