कैसे हुई ब्रह्माण्ड की शुरुआत, हिला देने वाली कहानी, जानिये पूरा सच !

- in ज़रा-हटके

हमारी दुनिया कितनी खुबसूरत है पर इस दुनिया में सब अपनी रोज की जिन्दगी में बीजी रहते है पर आपने कभी क्या ये सोचा है कि ये ब्रम्हाण्ड में आप इतने सालो से रह रहे हो. इसकी शुरुआत कैसे हुई. जितनी घटनाये हुई है उसको शुरुआत कैसे हुई ?

हमारी दुनिया कितनी खुबसूरत है पर इस दुनिया में सब अपनी रोज की जिन्दगी में बीजी रहते है पर आपने कभी क्या ये सोचा है कि ये ब्रम्हाण्ड में आप इतने सालो से रह रहे हो. इसकी शुरुआत कैसे हुई. जितनी घटनाये हुई है उसको शुरुआत कैसे हुई ? आखिर किसने रचा ब्रह्मांड? यह सवाल आज भी उतना ही ताजा है जितना की प्राचीन काल में हुआ करता था। ईश्वर के होने या नहीं होने की बहस भी प्राचीन काल से चली आ रही है। अनिश्वरवादी मानते आए हैं कि यह ब्रह्मांड स्वत:स्फूर्त है, लेकिन ईश्‍वरवादी तो इसे ईश्वर की रचना मानते हैं। अधिकतर लोग धर्मग्रंथों में जो लिखा है उसे बगैर विचारे पत्थर की लकीर की तरह मानते हैं और कट्टरता की हद तक मानते हैं।  वेद, पुराण, ज़न्द अवेस्ता, तनख (ओल्ड टेस्टामेंट), बाइबल, कुरान और गुरुग्रंथ आदि सभी धर्मग्रंथ ब्रह्मांड को ईश्वरकृत मानते हैं। लेकिन दर्शन और विज्ञान अभी भी इसके बारे में बहस और शोध करते रहते हैं। पहले कि अपेक्षा विज्ञान ने ब्रह्मांड के बहुत सारे रहस्यों से पर्दा उठा दिया है…देखना है कि आगे क्या होता है? वैज्ञानिकों को ये पता चला कि हमारा ब्रम्हाण्ड चारो ओर से फ़ैल रहा है ये ब्रम्हाण्ड हर एक सैकेंड साइज में बढ़ता जा रहा है.  कुछ दिनों पूर्व विश्व के अग्रणी भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने निष्कर्ष निकाला था कि ईश्वर ने यह ब्रह्मांड नहीं रचा है, बल्कि वास्तव में यह भौतिक विज्ञान के अपरिहार्य नियमों का नतीजा है। हॉकिंग ने अपनी नवीनतम किताब ‘द ग्रैंड डिजाइन’ में कहा कि चूंकि गुरुत्वाकषर्ण जैसे कानून हैं, ब्रह्मांड कुछ नहीं से खुद को सृजित कर सकता है और करेगा। स्वत:स्फूर्त सृजन के चलते ही कुछ नहीं के बजाय कुछ है, ब्रह्मांड का वजूद है, हमारा वजूद है।  अधिक जानकारी के लिए देखें नीचे दी गयी विडियो !आखिर किसने रचा ब्रह्मांड? यह सवाल आज भी उतना ही ताजा है जितना की प्राचीन काल में हुआ करता था। ईश्वर के होने या नहीं होने की बहस भी प्राचीन काल से चली आ रही है। अनिश्वरवादी मानते आए हैं कि यह ब्रह्मांड स्वत:स्फूर्त है, लेकिन ईश्‍वरवादी तो इसे ईश्वर की रचना मानते हैं। अधिकतर लोग धर्मग्रंथों में जो लिखा है उसे बगैर विचारे पत्थर की लकीर की तरह मानते हैं और कट्टरता की हद तक मानते हैं।

वेद, पुराण, ज़न्द अवेस्ता, तनख (ओल्ड टेस्टामेंट), बाइबल, कुरान और गुरुग्रंथ आदि सभी धर्मग्रंथ ब्रह्मांड को ईश्वरकृत मानते हैं। लेकिन दर्शन और विज्ञान अभी भी इसके बारे में बहस और शोध करते रहते हैं। पहले कि अपेक्षा विज्ञान ने ब्रह्मांड के बहुत सारे रहस्यों से पर्दा उठा दिया है…देखना है कि आगे क्या होता है? वैज्ञानिकों को ये पता चला कि हमारा ब्रम्हाण्ड चारो ओर से फ़ैल रहा है ये ब्रम्हाण्ड हर एक सैकेंड साइज में बढ़ता जा रहा है.

कुछ दिनों पूर्व विश्व के अग्रणी भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने निष्कर्ष निकाला था कि ईश्वर ने यह ब्रह्मांड नहीं रचा है, बल्कि वास्तव में यह भौतिक विज्ञान के अपरिहार्य नियमों का नतीजा है। हॉकिंग ने अपनी नवीनतम किताब ‘द ग्रैंड डिजाइन’ में कहा कि चूंकि गुरुत्वाकषर्ण जैसे कानून हैं, ब्रह्मांड कुछ नहीं से खुद को सृजित कर सकता है और करेगा। स्वत:स्फूर्त सृजन के चलते ही कुछ नहीं के बजाय कुछ है, ब्रह्मांड का वजूद है, हमारा वजूद है।

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