कॅरोना वायरस से सीख

कर्नल प्रमोद शर्मा
यह कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि दुनिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी आपदा ने सबसे ज्यादा झकझोरा है तो वह कॅरोना ही है।किसी भी देश को इसके जांच और इलाज,नही सूझ रहा है।चीन,योरप,अमेरिका से भयावह तस्वीरें निकल के आ रही हैं।फिलहाल यह वायरस इंसानों के फेफड़ों से निकलने वाली सूक्षम ड्राप लेटस तक सीमित है जो इंसानी सम्पर्क से फैल रहा है।
लेकिन फ़र्ज़ करिए यदि ग्राउंड वाटर में कुछ ऐसी जान लेवा वायरस फैल जाए तो कल्पना करिए पृथ्वी की क्या दशा होगी।देश के अधिकांश लोगों को पाइप से साफ पानी उपलब्ध नही है। पचास फीसदी से ज्यादा लोग अभी भी हैंड पंप, कुओं,और झरनों से पीने के पानी की आपुर्ति करते हैं।
कर्नल प्रमोद शर्मा
देश के लगभग सभी हिस्सों में साल भर फैक्टरियों द्वारा अंधाधुन दूषित पानी जिसमें खतरनाक आर्सेनिक तत्व,भारी धातु,जहरीले तत्व लगातार चौबीस घण्टे नदी,नालों में छोड़ा जा रहा है और वही पानी ज़मीन में जा के पानी के सोत्रों को जहरीला बना रहा है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सिर्फ खाना पूर्ति में जुटा है।
इसके पहले की ये जहरीले तत्व पानी के सोत्रों में किसी नए वायरस को जन्म दे जो मानव जाति के लिए घातक हो अपने मुल्क को चेत जाना चाहिए और कड़ाई से प्रदूषण फैलाने वालों को दंड की व्यवस्था और फैक्ट्री को बंद करने का प्रावधान करना चाहिए।ये पूंजीपति जो बड़े कारखानों के मालिक हैं,अपने से या तो प्रदूषण के रोकथाम के लिए कुछ करेंगे नही या दिखावा मात्र करेंगे।
धन के लालच ने हमें अंधा कर दिया है।गांधी का कथन, पृथ्वी सभी जीवों के आव्यशाक्तों को तो पूरा कर सकती है पर उनके लालच को पूरा करने में अक्षम है पूरी तरह सत्य और तार्किक है।
इससे पहले की कोई नई त्रासदी आये हमें चेत लेना चाहिए।
लेखक : कर्नल प्रमोद शर्मा। संयोजक,स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी,पूर्व सौनिक, कृषक संगठन।

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