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कुदरत ने इस नन्ही परी के साथ किया अन्याय, दिया आधा दिल

कुछ दिन पहले चार माह की बच्ची को पांच साल बाद ऑपरेशन की डेट देने वाले देश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सीय संस्थान एम्स ने अब तीन माह की बच्ची को 2021 में आकर इलाज कराने की नसीहत दी है। उत्तर प्रदेश पुलिस का जवान पिछले दो महीने से रातदिन सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से अपनी बेटी के लिए संजीवनी मांग रहा है। कुदरत ने इस नन्ही परी के साथ किया अन्याय, दिया आधा दिल

मगर उस पिता की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद निवासी सनत कुमार सिंह इलाहाबाद में एडीजी जोन में सर्विलांस टीम में तैनात हैं। इससे पहले वे डीजी की सोशल मीडिया टीम में थे। वहां से फेसबुक और ट्विटर चलाना सीखा। 

जब एम्स में तीन साल बाद ऑपरेशन की तारीख मिली तो उन्हें सोशल मीडिया की याद आई और फिर मदद मांगना शुरू किया। मगर यूपी पुलिस की ओर से हर ट्वीट का जवाब देने वाला जवान अब खुद अपने जवाब की तलाश में है।
          
चार महीने के भीतर ऑपरेशन जरूरी 
सनत कुमार की बेटी वैष्णवी ने इसी साल फरवरी में जन्म लिया। परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन चंद रोज बाद जांच कराने पर वैष्णवी के शरीर में आधा दिल और दो आर्टरी एक ही ओर होने की पुष्टि हुई। जिसके बाद परिवार सदमे में आ गया। आनन फानन में वैष्णवी को लेकर एम्स पहुंचे।

कार्डियोलॉजी विभाग में दिखाया तो डॉक्टरों ने भी चार माह के भीतर ऑपरेशन कराने की सलाह दी। लेकिन डॉक्टरों ने लाचारी व्यक्त करते हुए ये भी कहा कि एम्स में 10 मई 2021 से पहले ऑपरेशन नहीं किया जा सकता। इसे कहीं और ले जाओ। इसके बाद से ही जवान हताश है।

समय बीता, अब भी ऑपरेशन का इंतजार
सनत के अनुसार एम्स के डॉक्टरों ने चार माह का वक्त दिया है। जोकि अब खत्म होने को है। अब वह और भी ज्यादा परेशान हैं। चूंकि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि दिल्ली के निजी अस्पताल में ऑपरेशन करा सकें। लिहाजा उन्होंने बड़ी ही मुश्किल से सर गंगाराम अस्पताल में मदद मांगी है। जहां से जवाब आना बाकी है।

वेटिंग नहीं हुई कम, एम्स ने बना डाली मुहर
एम्स में वेटिंग का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्षों तक पहुंच रही वेटिंग को कम करने के लिए एम्स प्रबंधन के इंतजाम नाकाफी साबित हुए। शायद इसीलिए एम्स ने ऐसा फैसला लिया है, जिसे अब तक देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में देखा नहीं गया।

एम्स ने अब एक ऐसी मुहर बनाई है, जिसे वेटिंग के साथ मरीज के कार्ड पर चस्पा कर दिया जाता है। इसमें लिखा है, दाखिले की अनुमति तारीख मरीजों की भीड़ के कारण शीघ्र भर्ती संभव नहीं है। जल्द उपचार के लिए अन्य सरकारी अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं।

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