किरण चौधरी के एक दांव ने विरोधियों को किया चारों खाने चित्त, जानिए कैसे.?

चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस की तेज तर्रार नेता किरण चौधरी ने अपने एक दांव से राजनीतिक विरोधियों को चारों खाने चित्त कर दिया है। किरण चौधरी को कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से हटाने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हुड्डा गुट को ऐसी पटखनी मिली कि अब उन्हें नए सिरे से रणनीति बनाने को मजबूर होना पड़ गया है।किरण चौधरी के एक दांव ने विरोधियों को किया चारों खाने चित्त, जानिए कैसे.?

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किरण और तंवर को लंबे समय से हटाने की मुहिम चला रहा था हुड्डा खेमा
कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने हाल ही में स्पीकर को पत्र लिखकर विपक्ष के नेता पद पर अपनी दावेदारी ठोंक दी है। अभय चौटाला की पार्टी इनेलो के विधायकों की संख्‍या 19 से घटकर 11 रह जाने के बाद स्पीकर ने उन्हें विपक्ष के नेता पद से हटा दिया था। कांग्रेस के पास 17 विधायक हैं। इसलिए विपक्ष के नेता पद पर कांग्रेस की दावेदारी बनती है।

स्पीकर के सामने किरण चौधरी को ही विपक्ष का नेता बनाने की मजबूरी
हरियाणा विधानसभा में प्रावधान है कि यदि विधायक दल का नेता या पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किसी विधायक का नाम लिखकर दें तो स्पीकर उसे विपक्ष का नेता बना सकते हैं। कांग्रेस अभी स्पीकर के इस प्रस्ताव पर कोई नाम फाइनल करने का विचार ही कर रही थी कि किरण चौधरी ने गुपचुप ढंग से दांव खेलते हुए विधानसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर विपक्ष के नेता पद पर अपनी दावेदारी जता दी है।

हरियाणा में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी का शिकार है। हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस दिग्गज भले ही एक मंच पर आ गए, लेकिन अभी तक उनके दिल नहीं मिल पाए हैं। जींद उपचुनाव में कांग्रेस दिग्गज रणदीप सिंह सुरजेवाला की हार तथा गैर जाट नेता के रूप में कुलदीप बिश्नोई द्वारा हुड्डा का नेतृत्व नकारने की रणनीति से साफ है कि अभी भी कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

हरियाणा में कांग्रेस के 17 विधायकों में से 13 हुड्डा समर्थक हैं। उन्होंने पिछले काफी समय से अशोक तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से और किरण चौधरी को कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से हटाने की मुहिम चला रखी है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह मुहिम कुछ ढीली पड़ी थी, लेकिन किरण चौधरी ने विधानसभा सचिवालय के ढीले नियमों का फायदा उठाते हुए स्पीकर को चिट्ठी लिखकर उन्हें विपक्ष का नेता बनाने की मांग कर डाली है।

विधानसभा स्पीकर हालांकि इस चिट्ठी के वैधानिक और संवैधानिक पहलुओं की पड़ताल करा रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि किरण चौधरी की चिट्ठी को नजर अंदाज कर दिया जाए। डॉ. अशोक तंवर और भूपेंद्र हुड्डा हालांकि विपक्ष के नेता पद के लिए कोई नाम सर्वस मति से तय होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले कि कोई नाम कांग्रेस की तरफ से जाए, भाजपा किरण चौधरी के नाम पर बड़ा दांव खेल सकती है।

” अभी कांग्रेस विधायक दल की कोई मीटिंग नहीं हुई है। किरण चौधरी ने व्यक्तिगत रूप से कोई पत्र विधानसभा सचिवालय को लिखा होगा, मुझे इसकी कोइ अधिकारिक जानकारी नहीं है। सर्वसम्‍मति से कोई नाम तय कर विधानसभा स्पीकर के पास भेजा जाएगा।

पहले लोकसभा चुनाव में जीत उसके बाद विपक्ष का नेता: हुड्डा

”अभी हमारी पूरी पार्टी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त है। अभी तक विपक्ष के नेता पद के लिए कोई नाम तय नहीं किया गया है। फिलहाल हमारे लिए लोकसभा चुनाव में सभी दस सीटें जीतना महत्वपूर्ण है। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष के नेता पद के लिए सर्वसम्‍मति से कोई नाम तय कर प्रदेश अध्यक्ष के जरिये विधानसभा स्पीकर के पास भेज दिया जाएगा।

चिट्ठी लिखकर मैंने कुछ गलत नहीं किया: किरण चौधरी

” विधानसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए चिट्ठी लिखने का मुझे अधिकार है। मैं कांग्रेस विधायक दल की नेता हूं। मैं पत्र लिख सकती हूं। इसलिए मैंने लिखा। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। पार्टी और कार्यकर्ता हमारे साथ हैं।

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